Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश में सोमवार तड़के आए भीषण तूफान और आसमानी बिजली ने भारी तबाही मचाई है। राज्य के कुल्लू, मंडी और कांगड़ा जिलों में कुदरत का ऐसा तांडव दिखा कि कई घर ढह गए और मवेशियों की जान चली गई। तेज हवाओं ने स्कूलों और गौशालाओं की छतें उखाड़ दीं। इस आपदा में कुल्लू में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि कांगड़ा में बिजली लाइन ठीक करते समय एक लाइनमैन ने अपनी जान गंवा दी।
कुल्लू जिले के बंजार क्षेत्र में तबाही का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला। यहां घालिंचा और कंडी जैसे गांवों में पांच मकानों और दस गौशालाओं की छतें उड़ गईं। जलोरी दर्रे पर विशालकाय पेड़ गिरने से सड़क पूरी तरह बंद हो गई। बिजली की तारें टूटने से कई इलाके अंधेरे में डूब गए हैं। प्रशासन राहत कार्यों में जुटा है, लेकिन लगातार हो रही बारिश और खराब मौसम के कारण बहाली के काम में काफी बाधा आ रही है।
मंडी और कांगड़ा में मवेशियों और वाहनों को भारी नुकसान
मंडी के सुंदरनगर में आसमानी बिजली गिरने से दर्जनों मवेशियों की मौके पर ही मौत हो गई। गांव के लोग इस आर्थिक नुकसान से सदमे में हैं। वहीं, कांगड़ा के वृंदावन क्षेत्र में एक दर्दनाक हादसा हुआ। यहां बिजली बोर्ड के एक लाइनमैन की करंट लगने से मृत्यु हो गई। वह तूफान के कारण आई खराबी को ठीक कर रहे थे, तभी अचानक बिजली आपूर्ति बहाल हो गई। बैजनाथ और छोटा भंगाल में भी पेड़ गिरने से कई वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं।
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, सुंदरनगर और बिलासपुर में हवा की रफ्तार 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई थी। शिमला और कांगड़ा में भी बिजली चमकने के साथ मध्यम बारिश दर्ज की गई। कुल्लू के नग्गर में बिजली गिरने से नेपाल निवासी बालकृष्ण की जान चली गई और दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को तुरंत राहत सहायता देने के निर्देश जारी किए हैं।
मौसम विभाग का अलर्ट: 17 मई तक नहीं मिलेगी राहत
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि हिमाचल में बारिश का यह सिलसिला 16 मई तक जारी रहेगा। 15 मई को एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है, जो उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करेगा। राज्य के अधिकांश हिस्सों में 12 और 13 मई को बारिश के साथ बर्फबारी का भी अनुमान है। 17 मई तक मौसम के मिजाज तल्ख रहेंगे। विभाग ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों को ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों और नदी-नालों के किनारे न जाने की सलाह दी है।

