Himachal News: हिमाचल प्रदेश में बेमौसमी बारिश, तेज आंधी और भारी ओलावृष्टि ने भयंकर तबाही मचाई है। राज्य में अब तक कुल 29 करोड़ रुपये की संपत्ति के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। इसमें से अकेले कृषि और बागवानी क्षेत्र को लगभग 10 करोड़ रुपये की चपत लगी है। अप्रैल और मई के महीनों में बदले मौसम के मिजाज ने किसानों और बागवानों की कमर तोड़ दी है। सेब उत्पादक क्षेत्रों में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक बनी हुई है।
सेब के गढ़ शिमला और मंडी में भारी ओलावृष्टि से फसलों को क्षति
हिमाचल के प्रमुख सेब उत्पादक जिलों जैसे शिमला, मंडी, कुल्लू और सिरमौर में मौसम ने सबसे ज्यादा तांडव दिखाया है। शिमला जिले के जुब्बल-कोटखाई, रोहड़ू और ठियोग क्षेत्रों में ओलावृष्टि से सेब की फसल पूरी तरह प्रभावित हुई है। पेड़ों पर आए छोटे फल टूटकर गिर गए हैं। सिर्फ फल ही नहीं, बल्कि नई टहनियों और पत्तियों को भी नुकसान पहुँचा है। इससे बागवानों को न केवल इस साल, बल्कि अगले साल के उत्पादन की भी चिंता सता रही है।
सब्जी उत्पादकों पर भी गिरी गाज: मटर और गोभी की खेती प्रभावित
मौसम की इस मार से केवल फल ही नहीं, बल्कि नकदी फसलें भी अछूती नहीं रही हैं। भारी ओलावृष्टि के कारण मटर, गोभी और बीन जैसी महत्वपूर्ण सब्जियों की फसलें बर्बाद हो गई हैं। खेतों में खड़ी फसल ओलों की वजह से दब गई है, जिससे किसानों की लागत भी निकलना मुश्किल लग रहा है। निचले इलाकों में भी तेज हवाओं ने फसलों को काफी नुकसान पहुँचाया है। किसान अब सरकार से विशेष राहत पैकेज और मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
विशेषज्ञों की चेतावनी: उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर पड़ेगा बुरा असर
हिमाचल प्रदेश फल एवं सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान और विशेषज्ञ डॉ. सतीश शर्मा ने स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि आंधी और ओलावृष्टि ने सेब सहित अन्य फलों के विकास को रोक दिया है। भारी ओलावृष्टि से पौधों की नई शाखाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इससे आने वाले सीजन की वृद्धि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। यदि मौसम का यही हाल रहा, तो फलों की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में बड़ी गिरावट आने की पूरी संभावना है।
आगामी दिनों के लिए मौसम विभाग का अलर्ट: बागवानों की बढ़ी मुश्किलें
मौसम विभाग ने आने वाले कुछ दिनों के लिए राज्य में फिर से आंधी और ओलावृष्टि की संभावना जताई है। इस पूर्वानुमान ने बागवानों की रातों की नींद उड़ा दी है। पहले ही कम बर्फबारी के कारण सेब की फसल पर संकट था, अब असमय बारिश ने रही-सही कसर पूरी कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन का सीधा असर राज्य की आर्थिकी पर पड़ रहा है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए बागवानी विभाग नुकसान का विस्तृत आकलन करने में जुटा है।

