Himachal News: हिमाचल प्रदेश में साल 2023 के बाद से प्राकृतिक आपदाओं और विनाशकारी भूस्खलन की घटनाओं में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। लगातार हो रही इन घटनाओं ने जनजीवन के साथ-साथ राज्य के बुनियादी ढांचे को गहरी क्षति पहुंचाई है। अब प्रदेश की सुक्खू सरकार ने मानसून की दस्तक से पहले इस चुनौती से निपटने के लिए एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार किया है। लोक निर्माण विभाग ने भूस्खलन रोकने के लिए एक विशेष खाका तैयार किया है, जिसे आगामी बैठक में अंतिम रूप दिया जाएगा।
12 मई को सचिवालय में होगी अहम बैठक और नीति निर्धारण
सचिवालय में आगामी 12 मई को प्रधान सचिव देवेश कुमार की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक प्रस्तावित है। इस महत्वपूर्ण बैठक में लोक निर्माण विभाग द्वारा तैयार किया गया प्रस्ताव विस्तार से रखा जाएगा। गहन चर्चा के बाद इस ड्राफ्ट से विभागीय मंत्री विक्रमादित्य सिंह को अवगत कराया जाएगा। इसके तुरंत बाद कैबिनेट बैठक में इस नई नीति पर अंतिम मुहर लगेगी। माना जा रहा है कि इसी महीने यह नई लैंडस्लाइड पॉलिसी पूरे प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू कर दी जाएगी।
हाईकोर्ट के निर्देश पर पांच विभागों ने मिलाया हाथ
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने भी भूस्खलन की बढ़ती घटनाओं पर सख्त रुख अपनाते हुए सरकार को त्वरित समाधान खोजने के निर्देश दिए थे। न्यायालय के आदेशानुसार लोक निर्माण, जल शक्ति, आपदा प्रबंधन, राजस्व और वन विभाग की एक संयुक्त कमेटी बनाई गई है। इन पांचों विभागों ने वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर अपने महत्वपूर्ण सुझाव सरकार को सौंपे हैं। इन्ही सुझावों के आधार पर सरकार ने एक ऐसी नीति का प्रारूप तैयार किया है, जो भविष्य में होने वाले नुकसान को कम करेगी।
संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और तकनीकी ड्रेनेज सिस्टम पर जोर
सरकार की नई रणनीति के तहत प्रदेश के सबसे अधिक भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों की पहचान की जा रही है। नीति में इस बात पर जोर दिया गया है कि भूस्खलन के मूल कारणों का पता लगाया जाए और त्वरित ड्रेनेज सिस्टम में सुधार किया जाए। इसके साथ ही ढलानों की मजबूती, व्यापक पौधारोपण और मजबूत रिटेनिंग वाल बनाने जैसे वैज्ञानिक उपायों को प्राथमिकता दी जा रही है। विभागों के बीच बेहतर तालमेल बिठाकर मानसून से पहले संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा कार्य शुरू करना सरकार का मुख्य लक्ष्य है।
चक्की मोड़ और सराज जैसे हॉटस्पॉट्स पर विशेष निगरानी
पिछले वर्ष सराज विधानसभा क्षेत्र और कालका-शिमला फोरलेन पर चक्की मोड़ जैसी जगहों पर भारी तबाही देखी गई थी। मंडी के पंडोह, कोटरूपी और कुल्लू के विभिन्न हिस्सों सहित किन्नौर एवं लाहौल-स्पीति में भूस्खलन एक स्थाई संकट बन चुका है। विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि यदि मानसून से पहले ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति फिर से गंभीर हो सकती है। प्रशासन ने सभी जिला अधिकारियों को संवेदनशील इलाकों में चौबीसों घंटे कड़ी निगरानी रखने और त्वरित रिस्पांस टीम तैनात करने को कहा है।

