हिमाचल में चुनाव से पहले ही बन गई सरकार! इस गांव ने बिना वोटिंग के चुनी पंचायत, जानें कैसे हुआ चमत्कार

Himachal Pradesh News: राज्य में पंचायत चुनावों की तारीखों का बेसब्री से इंतजार हो रहा है। इसी बीच बिलासपुर जिले ने एक अनूठी मिसाल पेश की है। यहाँ के एक गांव में बिना वोटिंग के ही पंचायत प्रमुखों का चयन कर लिया गया। ग्रामीणों ने आपसी सहमति से अपने स्थानीय नेता चुने हैं। इस नई पंचायत ने पूरे प्रदेश के सामने विकास और आपसी एकता का एक बेहतरीन उदाहरण रखा है। यह फैसला तब आया जब राज्य में चुनाव लंबित हैं।

नई पंचायत ने पेश की मिसाल

घुमारवीं उपमंडल में दाधोल और पद्यालाग पंचायतों से अलग होकर एक नई पंचायत बनी है। इस नई पंचायत का नाम छंदोह रखा गया है। शनिवार को यहां के ग्रामीणों ने एक बहुत अहम बैठक की। उन्होंने चुनाव में राजनीतिक टकराव से बचने का सीधा फैसला किया। विकास को प्राथमिकता देते हुए प्रधान और उप-प्रधान के नामों पर सभी ने सहमति जताई। पांच वार्ड सदस्यों को भी बिना किसी विरोध के चुन लिया गया। यह पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण रही।

जानिए किन्हें मिली जिम्मेदारी

गांव की यह बैठक पूर्व पंचायत प्रमुख मेहर सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुई। ग्रामीणों ने सभी पदों के लिए योग्य नाम तय किए। सुभाष रनौत को सर्वसम्मति से पंचायत का प्रधान चुना गया। बलजीत कश्यप को उपप्रधान की अहम जिम्मेदारी मिली। पांच वार्ड सदस्यों के लिए भी पूरी सहमति बनी। जसवानी से सोनू, मरयानी से प्रकाश, पन्याली से बनिता, दोहरू से পূनम और छंदोह से ओंकार सदस्य बने। नई टीम ने गांव के विकास का पूरा वादा किया।

निर्विरोध चुनाव पर मिलता है इनाम

राज्य सरकार निर्विरोध चुनाव को हमेशा बढ़ावा देती है। यदि किसी पंचायत में प्रधान, उपप्रधान और सभी वार्ड सदस्य सर्वसम्मति से चुने जाते हैं, तो भारी इनाम मिलता है। सरकार ऐसी पंचायत को सीधे 10 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि देती है। पंचायत समिति के निर्विरोध चुने जाने पर पांच लाख रुपये मिलते हैं। जिला परिषद के लिए 15 लाख रुपये का प्रावधान है। छंदोह पंचायत को भी अब विकास कार्यों के लिए यह बड़ी प्रोत्साहन राशि आसानी से मिल जाएगी।

चुनाव की तारीखों का है इंतजार

हिमाचल प्रदेश में अभी 3600 से ज्यादा पंचायतों में चुनाव होने बाकी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन चुनावों के लिए 31 मई की डेडलाइन तय की है। राज्य चुनाव आयोग जल्द ही पंचायत चुनाव का ऐलान करेगा। प्रशासन की चुनाव से जुड़ी तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। 31 जनवरी को ही पुरानी पंचायतों का कार्यकाल पूरी तरह खत्म हो चुका है। अब प्रदेश के सभी लोगों की नजरें नई चुनाव तारीखों की आधिकारिक घोषणा पर टिक गई हैं।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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