Himachal News: हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति एवं जनजाति विकास निगम ने अब ऋण डिफाल्टरों पर अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। निगम ने कर्ज न चुकाने वाले कुल एक सौ एक डिफाल्टरों को राजस्व अदालत में पेश होने का अंतिम नोटिस जारी किया है। इनमें से तैंतालीस डिफाल्टर कुल्लू और अट्ठावन मंडी जिले के रहने वाले हैं। बार-बार चेतावनी देने के बाद भी इन लोगों ने कर्ज का पैसा वापस नहीं किया है। अब इन सभी पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।
कुल्लू और मंडी की राजस्व अदालत में होगी सुनवाई
इन सभी डिफाल्टरों की आगामी तेरह और चौदह मई को राजस्व अदालत में सुनवाई तय की गई है। निगम का इन डिफाल्टरों के पास लगभग एक करोड़ ग्यारह लाख रुपये का कर्ज फंसा हुआ है। इसमें से मंडी के डिफाल्टरों पर पच्चीस लाख रुपये और कुल्लू के डिफाल्टरों पर छियासी लाख रुपये बकाया हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से कई लोगों ने साल दो हजार और दो हजार पांच के बीच यह ऋण लिया था।
पैसा नहीं लौटाने पर जारी होगा गिरफ्तारी वारंट
निगम ने इन डिफाल्टरों को पहले भी चार से पांच बार नोटिस भेजे थे। इसके बावजूद इन्होंने ऋण की एक भी किस्त वापस नहीं की। अदालत में पेशी के बाद भी अगर कोई ऋण जमा नहीं करता है, तो उसके खिलाफ सीधा गिरफ्तारी वारंट जारी होगा। निगम के प्रबंध निदेशक अजय कुमार यादव ने स्पष्ट किया है कि कर्ज न चुकाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे डिफाल्टरों के खिलाफ अब पुलिस गैर जमानती वारंट निकालेगी।
दस करोड़ रुपये की कुल रिकवरी है अभी बाकी
एससी-एसटी कॉरपोरेशन को पूरे राज्य में अभी भी लगभग दस करोड़ रुपये की रिकवरी करनी है। इससे पहले सिरमौर के नाहन में भी अड़तालीस डिफाल्टरों को राजस्व अदालत का नोटिस जारी किया गया था। वहां पेशी के बाद डिफाल्टरों ने एक लाख बारह हजार रुपये लौटा दिए हैं। जो लोग अदालत के आदेशों की अनदेखी कर रहे हैं, उनकी सूची तैयार कर पुलिस को सौंपी जा रही है। निगम ने अब तक छत्तीस डिफाल्टरों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए हैं।
