Maharashtra News: ‘सरके चुनर’ गाने से जुड़े विवाद में फिल्म अभिनेत्री नोरा फतेही आज राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) के समक्ष पेश होंगी। आयोग ने उन्हें सुबह 11:30 बजे सुनवाई के लिए बुलाया है। इससे पहले हुई सुनवाइयों में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित न होने पर आयोग ने कड़ा रुख अपनाया था। आयोग की अध्यक्ष विजया के. राहटकर ने स्पष्ट किया था कि किसी भी कलाकार का प्रतिनिधित्व वकील नहीं करेंगे। नोरा को खुद हाजिर होकर अपनी सफाई देनी होगी।
संजय दत्त ने मांगी माफी और आदिवासी बेटियों की शिक्षा का लिया जिम्मा
इस मामले में फिल्म अभिनेता संजय दत्त 27 अप्रैल को आयोग के सामने पेश हुए थे। उन्होंने विवादित बोलों के लिए लिखित माफी मांगी और एक महत्वपूर्ण घोषणा की। दत्त ने हलफनामा जमा कर 50 आदिवासी लड़कियों की पूरी पढ़ाई का खर्च उठाने का वादा किया। उन्होंने सफाई दी कि फिल्मांकन के दौरान गाना कन्नड़ में था और उन्हें हिंदी डबिंग की जानकारी नहीं थी। अभिनेता ने भविष्य में बच्चों और महिलाओं की गरिमा के सम्मान का आश्वासन दिया।
महिलाओं की गरिमा से समझौता नहीं: महिला आयोग का सख्त रुख
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया राहटकर ने गाने के बोलों पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि रचनात्मकता के नाम पर महिलाओं की मर्यादा को ठेस नहीं पहुंचाई जा सकती। आयोग ने कलाकारों को उनकी सामाजिक जिम्मेदारी याद दिलाई। सुनवाई के दौरान यह संदेश दिया गया कि मनोरंजन के क्षेत्र में भी नैतिक सीमाओं का पालन अनिवार्य है। आयोग इस मामले में फिल्म से जुड़े हर महत्वपूर्ण व्यक्ति से जवाबदेही तय कर रहा है।
कन्नड़ फिल्म ‘KD: The Devil’ के गाने पर मचा है बवाल
विवाद की जड़ कन्नड़ फिल्म ‘KD: The Devil’ का गाना ‘सरके चुनर’ है। सोशल मीडिया पर रिलीज होने के बाद इस गाने को अश्लीलता के आरोपों के कारण कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा। आयोग के सामने गीतकार रकीब आलम और निर्देशक प्रेम भी पेश हो चुके हैं। प्रोडक्शन कंपनी के प्रतिनिधियों ने लिखित माफीनामा जमा किया है। उन्होंने स्वीकार किया कि गाने का समाज पर नकारात्मक असर पड़ा है और भविष्य में महिला सशक्तिकरण पर ध्यान देंगे।
नोरा फतेही की पेशी पर टिकी सबकी निगाहें
नोरा फतेही के वकील 6 अप्रैल को आयोग के सामने पेश हुए थे, लेकिन आयोग ने इस उपस्थिति को खारिज कर दिया था। अब 7 मई की तारीख नोरा के लिए काफी अहम है। आयोग उनसे गाने में उनकी भूमिका और इसके फिल्मांकन से जुड़े सवाल पूछ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि नोरा को भी संजय दत्त की तरह कड़ी शर्तों का सामना करना पड़ सकता है। इस मामले ने फिल्म उद्योग में सेंसरशिप और नैतिकता पर नई बहस छेड़ दी है।
कलाकारों की सामाजिक जवाबदेही और भविष्य की राह
महिला आयोग के इस कड़े हस्तक्षेप से फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक नजीर पेश हुई है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि लोकप्रियता के लिए अश्लीलता का सहारा लेना स्वीकार्य नहीं है। संजय दत्त द्वारा की गई सामाजिक सेवा की पहल को आयोग ने सकारात्मक कदम माना है। अब देखना होगा कि नोरा फतेही आयोग के समक्ष क्या तर्क पेश करती हैं। यह मामला भविष्य में क्षेत्रीय फिल्मों के हिंदी डबिंग और उनके कंटेंट की निगरानी के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।

