Uttar Pradesh News: ग्रेटर नोएडा स्थित गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (GBU) में हुए पांच करोड़ रुपये के बहुचर्चित फीस घोटाले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। जिला न्यायालय द्वारा पूर्व कुलसचिव विश्वास त्रिपाठी और वित्त अधिकारी नीरज कुमार की अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद पुलिस ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। इस घोटाले की तह तक जाने के लिए पुलिस अब विश्वविद्यालय के दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन का फोरेंसिक ऑडिट कराएगी, ताकि पैसों की हेराफेरी के पुख्ता सबूत जुटाए जा सकें।
जमानत याचिका खारिज होने से बढ़ी हलचल
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने तीन दिन पहले ही मुख्य आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया था। कोर्ट ने माना कि यह मामला गंभीर वित्तीय अनियमितता से जुड़ा है। शासन द्वारा गठित विशेष कमेटी ने अपनी विस्तृत जांच में कुल 12 लोगों को इस घोटाले का दोषी पाया था। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया गया था। जमानत न मिलने से अब आरोपियों की गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है।
सीसीटीवी फुटेज और रिकॉर्ड छिपाने के आरोप
जांच कमेटी में शामिल रहे सीबीआई के पूर्व अधिकारी एनएन सिंह की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आरोप है कि पूर्व कुलसचिव के पास रजिस्ट्रार के साथ-साथ डीडीओ की भी शक्ति थी, लेकिन उन्होंने जानबूझकर फीस निगरानी में ढिलाई बरती। जांच के दौरान आरोपियों ने सीसीटीवी फुटेज देने से साफ इनकार कर दिया था और वित्तीय रिकॉर्ड भी छिपाए थे। इसी असहयोग और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका के कारण न्यायालय ने उन्हें कोई राहत नहीं दी।
बर्खास्तगी के बाद अब आवास खाली करने का नोटिस
विश्वविद्यालय के वर्तमान कुलसचिव ने स्पष्ट किया कि डॉ. विश्वास त्रिपाठी को पहले ही शैक्षणिक और प्रशासनिक योग्यता पूरी न होने के कारण पद से बर्खास्त किया जा चुका है। उन पर लगे पांच करोड़ के घोटाले के आरोपों के बाद अब प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। नियमानुसार, उनसे सरकारी आवास खाली कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामले में किसी भी स्तर पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।
इन 12 लोगों पर दर्ज है नामजद मुकदमा
इस बड़े घोटाले में पुलिस ने पूर्व कुलसचिव और वित्त अधिकारी के अलावा लेखा विभाग के मुदित कुमार और आउटसोर्सिंग कर्मचारी मुकेश पांडेय, शिव कुमार दत्त, शिवम, संदीप, श्याम, नवीन और सुभाष समेत कुल 12 लोगों को नामजद किया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, फोरेंसिक ऑडिट के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि छात्रों द्वारा जमा की गई फीस विश्वविद्यालय के खाते में जाने के बजाय किन-किन निजी बैंक खातों में ट्रांसफर की गई और इसमें तकनीकी हेरफेर कैसे हुआ।


