Defense News: भारत अब युद्ध के भविष्य को बदलने वाले छठी पीढ़ी (6th Gen) के लड़ाकू विमानों को विकसित करने की तैयारी कर रहा है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने संकेत दिया है कि इस विशाल परियोजना के लिए भारत अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों की तलाश में है। सरकार ने पहले ही दो प्रमुख अंतरराष्ट्रीय त्रि-राष्ट्रीय कार्यक्रमों से संपर्क कर सहयोग की इच्छा जताई है। यह कदम भारत की हवाई ताकत को अमेरिका, चीन और रूस जैसे देशों के समकक्ष लाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।
देश में बनेगा बहु-स्तरीय पारंपरिक मिसाइल बल
एएनआई नेशनल सिक्योरिटी समिट 2.0 में रक्षा सचिव ने देश की नई मिसाइल रणनीति का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि भारत एक शक्तिशाली बहु-स्तरीय पारंपरिक मिसाइल बल विकसित करने पर गंभीरता से काम कर रहा है। इस विशेष बल में छोटी, मध्यम और लंबी दूरी की अत्याधुनिक मिसाइलें शामिल की जाएंगी। वैश्विक संघर्षों के बदलते स्वरूप को देखते हुए भारत अपनी मिसाइल क्षमता को और अधिक घातक और सटीक बनाने के लिए संसाधनों का निवेश कर रहा है।
एएमसीए प्रोजेक्ट में निजी क्षेत्र की बढ़ेगी भागीदारी
पांचवीं पीढ़ी के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) कार्यक्रम को लेकर भी बड़ी खबर सामने आई है। रक्षा सचिव के अनुसार, निजी क्षेत्र के चुने गए बोलीदाताओं के लिए जल्द ही रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी की जाएगी। इससे स्वदेशी स्टील्थ फाइटर जेट बनाने की प्रक्रिया में नई गति आएगी। सरकार अब लड़ाकू विमानों के उत्पादन के लिए केवल एचएएल (HAL) पर निर्भर रहने के बजाय अमेरिका और चीन की तर्ज पर दो अलग-अलग उत्पादन लाइनें तैयार करना चाहती है।
रक्षा निर्यात में भारत की लंबी छलांग
भारत के रक्षा निर्यात क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जा रही है। पिछले वर्ष रक्षा निर्यात करीब 38,000 करोड़ रुपये रहा, जो सालाना आधार पर 61 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी है। रक्षा सचिव ने भरोसा जताया कि 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये के निर्यात का लक्ष्य भारत आसानी से पार कर लेगा। दुनिया भर में चल रहे युद्धों के कारण भारतीय गोला-बारूद और तोपखानों की वैश्विक मांग में जबरदस्त तेजी आई है, जिससे घरेलू रक्षा उद्योग को नई दिशा मिली है।
पारंपरिक हथियारों की वैश्विक मांग और भविष्य
वैश्विक स्तर पर चल रहे तनाव ने पारंपरिक हथियारों की अहमियत एक बार फिर बढ़ा दी है। रक्षा सचिव ने संकेत दिया कि बदलते वैश्विक परिदृश्य को देखते हुए भारत को अपनी रक्षा रणनीति पर लगातार पुनर्विचार करना होगा। गोला-बारूद और तोप के गोलों जैसे हथियारों की मांग ने भारतीय कंपनियों के लिए नए बाजार खोल दिए हैं। भारत अब न केवल अपनी रक्षा जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि दुनिया के लिए एक प्रमुख रक्षा हब के रूप में तेजी से उभर रहा है।


