Himachal News: हिमाचल प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) ने चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। आयोग ने 41 वरिष्ठ अधिकारियों की पर्यवेक्षक के रूप में अंतिम तैनाती सूची जारी कर दी है। ये अधिकारी विभिन्न जिलों में चुनावी शुचिता और सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। आयोग किसी भी कीमत पर गड़बड़ी रोकने के लिए पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है।
कांगड़ा और शिमला में सबसे सख्त पहरा
जारी आदेश के मुताबिक, कांगड़ा और शिमला जिलों को रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील माना गया है। निर्वाचन आयोग ने इन दोनों वीआईपी जिलों में छह-छह पर्यवेक्षकों की तैनाती की है। प्रशासन का मुख्य फोकस इन क्षेत्रों में मतदान प्रक्रिया की कड़ी निगरानी करना है। इन जिलों में चुनावी आचार संहिता का कड़ाई से पालन करवाया जाएगा। किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर पर्यवेक्षक सीधे आयोग को अपनी गोपनीय रिपोर्ट भेजेंगे।
चंबा और मंडी में भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम
आयोग ने चंबा जिले की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए वहां पांच पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं। वहीं मंडी जिले में चार अनुभवी अधिकारियों को चुनावी मोर्चा संभालने की जिम्मेदारी दी गई है। ऊना और सिरमौर जैसे जिलों में भी तीन-तीन पर्यवेक्षकों की तैनाती हुई है। अनुभवी अधिकारियों के कंधों पर यह अहम जिम्मेदारी इसलिए है ताकि मतदान के दिन जनता का विश्वास बना रहे। ये सभी अधिकारी आचार संहिता की बारीकियों पर नजर रखेंगे।
छोटे जिलों में भी आयोग ने कसी कमर
हमीरपुर, बिलासपुर, सोलन और कुल्लू जैसे जिलों में आयोग ने दो-दो पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि स्थानीय निकाय चुनाव लोकतंत्र की सबसे बुनियादी इकाई हैं। इनका सुचारू और शांतिपूर्ण संचालन सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी तैनात अधिकारियों को निर्देश मिले हैं कि वे अपने कार्यक्षेत्र में सक्रिय रहकर किसी भी अप्रिय घटना या गड़बड़ी को समय रहते रोकें।
प्रशासनिक स्तर पर चुनाव की तैयारियां पूरी
पर्यवेक्षकों की यह तैनाती हिमाचल प्रदेश में व्यवस्थित चुनाव कराने की दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय है। राज्य निर्वाचन आयोग का मानना है कि अनुभवी पर्यवेक्षकों की मौजूदगी से पारदर्शी चुनावी प्रक्रिया को बल मिलेगा। सभी जिलों में तैनात ये 41 अधिकारी चुनाव प्रक्रिया के दौरान लोकतंत्र के प्रहरी के रूप में कार्य करेंगे। तैयारियों के अंतिम चरण में इस तैनाती से प्रशासनिक तंत्र में और भी अधिक कसावट आने की उम्मीद जताई जा रही है।


