सेब पर संकट: राहुल गांधी से मिलेंगे हिमाचल के बागवान, क्या केंद्र की नई नीति डुबो देगी करोड़ों का कारोबार?

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के बागवानी क्षेत्र पर मंडरा रहे खतरों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। एआईसीसी प्रवक्ता और ठियोग के विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के समक्ष बागवानों की चिंताओं को प्रमुखता से रखा है। कांगड़ा में आयोजित कांग्रेस की विशेष कार्यशाला में यह मुद्दा छाया रहा। राठौर ने चेतावनी दी है कि वैश्विक समझौतों और प्राकृतिक आपदाओं के कारण राज्य के सेब उत्पादकों का भविष्य अब दांव पर लगा है।

FTA समझौते से बागवानों की बढ़ी परेशानी

कुलदीप सिंह राठौर ने शुक्रवार को प्रेस वार्ता में बताया कि राहुल गांधी के साथ हुई बैठक में आयात शुल्क पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते के तहत सेब पर आयात शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है। इस कटौती से हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के बागवानों को भारी वित्तीय नुकसान होने की आशंका है। विदेशी सेब सस्ता होने से स्थानीय बाजार पूरी तरह प्रभावित होगा।

राहुल गांधी से दिल्ली में मुलाकात करेगा प्रतिनिधिमंडल

विधायक राठौर ने जानकारी दी कि हिमाचल के बागवानों का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल जल्द ही दिल्ली का दौरा करेगा। यह दल राहुल गांधी से सीधे मुलाकात कर अपनी जमीनी समस्याओं और चुनौतियों को उनके समक्ष रखेगा। राठौर ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और भाजपा ने इस गंभीर विषय को अब तक नजरअंदाज किया है। कांग्रेस इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाकर बागवानों के हितों की रक्षा के लिए सड़क से संसद तक संघर्ष करेगी।

गैस सिलेंडर की कीमतों पर केंद्र को घेरा

बागवानी के अलावा कुलदीप सिंह राठौर ने कमर्शियल गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस बढ़ोतरी से मध्यम और गरीब वर्ग के लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा। होटलों और ढाबों में खाने-पीने की चीजें महंगी होने से आम जनता का बजट बिगड़ जाएगा। राठौर ने आशंका जताई कि भविष्य में घरेलू गैस सिलेंडर के दाम भी बढ़ाए जा सकते हैं, जिससे महंगाई और बेकाबू हो जाएगी।

ओलावृष्टि से नुकसान और मुआवजे की मांग

हाल ही में प्रदेश के कई हिस्सों में हुई भारी ओलावृष्टि ने बागवानों की कमर तोड़ दी है। राठौर ने राज्य सरकार से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों का तुरंत वैज्ञानिक सर्वे करवाकर मुआवजा दिया जाए। उन्होंने बैंक कर्ज की अदायगी पर फिलहाल रोक लगाने का सुझाव भी दिया। राठौर के अनुसार, जब तक बागवान इस बड़े प्राकृतिक नुकसान से उबर नहीं जाते, तब तक उन्हें किश्तों के भुगतान में राहत देना प्रशासन की नैतिक जिम्मेदारी है।

Hot this week

Related News

Popular Categories