कांगड़ा की मलाई बर्फ का ऐसा स्वाद कि राहुल गांधी भी रह गए दंग, बिना बिजली कैसे बनी ठंडी कुल्फी?

Himachal News: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा की पारंपरिक ‘मलाई बर्फ’ के मुरीद हो गए हैं। कांगड़ा प्रवास के दौरान उन्होंने इस देसी कुल्फी का जमकर लुत्फ उठाया। कांगड़ा के स्थानीय युवक विनीत राहुल गांधी के लिए लकड़ी के पुराने बक्से में कंबल के बीच लपेटकर यह मलाई बर्फ लाए थे। राहुल को इसका स्वाद इतना पसंद आया कि उन्होंने एक के बाद एक दो बार मलाई बर्फ ली।

बिना बिजली और फ्रीज के कैसे बनी इतनी ठंडी?

राहुल गांधी कांगड़ा के गुप्त गंगा में कांग्रेस के ‘संगठन सृजन अभियान’ के समापन समारोह में शामिल होने आए थे। तीन राज्यों के 61 जिला अध्यक्षों को संबोधित करने के बाद दोपहर के भोजन के समय उन्हें यह मलाई बर्फ परोसी गई। राहुल इसकी ठंडक देखकर हैरान रह गए। उन्होंने उत्सुकता से पूछा कि बिना बिजली और फ्रिज के इसे कैसे ठंडा रखा जाता है? उन्होंने इसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों के बारे में भी जानकारी ली।

कांगड़ी धाम और आटे के सिड्डू का लिया आनंद

दोपहर के भोजन में राहुल गांधी को पारंपरिक ‘कांगड़ी धाम’ परोसी गई। उन्हें खास तौर पर आटे के सिड्डू दिए गए। स्वास्थ्य के प्रति सजग राहुल ने खाने से पहले स्पष्ट पूछा कि ये मैदे के तो नहीं हैं? उन्होंने बताया कि वह मैदे का सेवन बहुत कम करते हैं। आटे के सिड्डू और देसी धाम का स्वाद चखने के बाद उन्होंने हिमाचली व्यंजनों की जमकर सराहना की। कांगड़ा की मेहमाननवाजी ने उनका दिल जीत लिया।

सदियों पुरानी तकनीक से तैयार होती है मलाई बर्फ

कांगड़ा की मलाई बर्फ अपनी शुद्धता और पारंपरिक निर्माण शैली के लिए प्रसिद्ध है। इसे बनाने में बिजली का उपयोग बिल्कुल नहीं किया जाता। यह पूरी तरह दूध, चीनी, बादाम और इलायची के मिश्रण से तैयार होती है। घंटों तक दूध को उबालकर गाढ़ा किया जाता है। इसके बाद इसे जमाने के लिए ठंडे पानी से तापमान को संतुलित करने की पुरानी तकनीक अपनाई जाती है। इसे आज भी प्राकृतिक पत्तों में परोसा जाता है।

कंबल में लपेटकर लकड़ी के बक्से में पहुंची राहुल तक

विनीत नामक युवक ने राहुल गांधी तक इसे पहुंचाने के लिए पारंपरिक तरीका अपनाया। लकड़ी के बक्से के भीतर कंबल की परतों के बीच इसे सुरक्षित रखा गया था ताकि यह पिघले नहीं। राहुल गांधी ने इस देसी तकनीक और स्वाद की काफी प्रशंसा की। इस आयोजन ने कांगड़ा के स्थानीय खान-पान और पारंपरिक धरोहर को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दी है। राहुल का यह सादगी भरा अंदाज कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा का विषय बना रहा।

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