कागज के जहाज उड़ाने वाले लड़के ने रचा इतिहास, धर्मशाला के प्रियव्रत ऐसे बने इंडिगो एयरलाइंस के पायलट

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला से एक बेहद प्रेरणादायक खबर सामने आई है। बचपन में खिलौने वाले जहाज उड़ाने वाले प्रियव्रत भारद्वाज ने अब सच में आसमान नाप लिया है। उनकी कड़ी मेहनत और पिता के मजबूत हौसले ने इस सपने को साकार कर दिया है। प्रियव्रत को इंडिगो एयरलाइंस में जूनियर फर्स्ट ऑफिसर (जेएफओ) के पद पर तैनाती मिल गई है। उनकी इस बड़ी सफलता से पूरे इलाके में जश्न का माहौल है।

कड़ी मेहनत से तय किया पायलट बनने का सफर

प्रियव्रत का जन्म अजय भारद्वाज और सोनम भारद्वाज के घर हुआ। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा हाईलैंड पब्लिक स्कूल से पूरी की। बचपन से ही उनका लक्ष्य पायलट बनने का था। प्रियव्रत ने भिवानी और नारनौल स्थित फ्लाइंग स्कूल में दो साल तक पायलट का कड़ा प्रशिक्षण लिया। इस दौरान उन्होंने कई चरणों में दो सौ घंटे की उड़ान का अनुभव प्राप्त किया। इसी कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने अपनी सफलता की मजबूत नींव रखी।

आबूधाबी में ली एयरबस ए320 की खास ट्रेनिंग

कड़ी मेहनत के बाद प्रियव्रत का चयन भारत की प्रमुख एयरलाइन इंडिगो में हुआ। चयन के बाद कंपनी ने उन्हें विशेष प्रशिक्षण के लिए आबूधाबी भेजा। वहां उन्होंने पूरे चालीस दिन तक एयरबस ए320 विमान उड़ाने की गहन ट्रेनिंग ली। सात अप्रैल को गुरुग्राम में एक भव्य ग्रेजुएशन सेरेमनी का आयोजन हुआ था। इस खास मौके पर प्रियव्रत की काबिलियत और उनके जज्बे को सभी ने खुले दिल से सलाम किया।

परिवार और दोस्तों ने जताई अपार खुशी

बेटे की इस बड़ी सफलता पर माता-पिता की खुशी का कोई ठिकाना नहीं है। पिता अजय और मां सोनम ने कहा कि प्रियव्रत ने अपनी लगन से उनका सपना पूरा किया है। दादी कमलेश ने भावुक होते हुए कहा कि उनका पोता हमेशा से ही बहुत शांत और दृढ़ निश्चयी था। प्रियव्रत की बड़ी बहन भूमिका भारद्वाज भी कनाडा में फार्मा को-विजिलेंस वैज्ञानिक के तौर पर देश का नाम रोशन कर रही हैं।

युवाओं को दिया लक्ष्य तय करने का संदेश

पायलट बनने के बाद प्रियव्रत ने युवाओं को एक बहुत ही खास संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि अगर इंसान का लक्ष्य बड़ा हो तो रास्ते की चुनौतियां खुद ही छोटी पड़ जाती हैं। सफलता पाने के लिए एक सही दिशा में लगातार आगे बढ़ना बहुत जरूरी होता है। प्रियव्रत का मानना है कि इंसान को हमेशा बड़े सपने देखने चाहिए, क्योंकि यही सपने एक दिन इंसान को उसकी असली मंजिल तक पहुंचाते हैं।

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