National News: सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के खाली पद राज्यों को भारी पड़ेंगे। शिक्षा मंत्रालय अब बहुत सख्त कदम उठाने जा रहा है। संसदीय समिति की सिफारिश के बाद लापरवाही बरतने वाले राज्यों की वित्तीय मदद रुक सकती है। समग्र शिक्षा अभियान के फंड में कटौती संभव है। देश में शिक्षकों के लगभग दस लाख पद खाली हैं। केंद्र सरकार ने इस गंभीर मुद्दे पर राज्यों को कई बार चेतावनी दी है।
संसदीय समिति ने दिखाई सख्ती
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने सख्त रुख अपनाया है। समिति ने अपनी 349वीं और 363वीं रिपोर्ट में लगातार भर्ती की मांग की है। इसके बावजूद राज्यों ने खाली पद नहीं भरे हैं। ऐसे में समिति ने समग्र शिक्षा के फंड को रोकने की साफ सिफारिश की है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार ने इस अभियान के तहत 41,249 करोड़ रुपये दिए हैं। यह भारी-भरकम राशि स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए है।
राज्यों की लापरवाही पर गिरेगी गाज
शिक्षा मंत्रालय लगातार राज्यों से शिक्षकों की भर्ती करने की अपील कर चुका है। लेकिन राज्यों का ढुलमुल रवैया जस का तस बना हुआ है। राज्य हर साल केंद्र से स्कूली ढांचे को मजबूत करने के लिए पैसा लेते हैं। इसके बावजूद बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों की घोर कमी है। मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि अब फंड की कड़ी समीक्षा की जा रही है। मानक पूरे न करने वाले राज्य अब कार्रवाई झेलेंगे।
आंकड़ों में खाली पदों की सच्चाई
देशभर में शिक्षकों के रिक्त पदों के आंकड़े बेहद डराने वाले हैं। वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट के मुताबिक, प्राथमिक विद्यालयों में कुल 45.46 लाख पद स्वीकृत हैं। इनमें से करीब 5.72 लाख पद यानी 12.60 प्रतिशत खाली हैं। वहीं, माध्यमिक स्तर पर 24.29 लाख स्वीकृत पदों में से 4.09 लाख पद भरे नहीं गए हैं। यह माध्यमिक स्तर का 16.81 फीसदी हिस्सा है। दोनों को मिलाकर लगभग दस लाख शिक्षकों के पद खाली हैं।
यूपी और बिहार का हाल सबसे खराब
विभिन्न राज्यों में शिक्षकों के रिक्त पदों की स्थिति बहुत गंभीर है। सबसे बुरी स्थिति उत्तर प्रदेश की है, जहां 2.17 लाख पद खाली पड़े हैं। इनमें 1.43 लाख पद केवल प्राथमिक स्तर के हैं। इसके बाद बिहार में 1.92 लाख शिक्षकों की जरूरत है। झारखंड में 72 हजार और पश्चिम बंगाल व मध्य प्रदेश में 55-55 हजार पद रिक्त हैं। हरियाणा में 15 हजार और जम्मू-कश्मीर में 13 हजार पद खाली हैं। नई सख्ती भारी पड़ेगी।


