बिहार कैबिनेट विस्तार की घड़ी आई! नीतीश से मंत्रणा के बाद अचानक दिल्ली पहुंचे सम्राट चौधरी, क्या चौंकाएगी नई लिस्ट?

Bihar News: बिहार की राजनीति में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। पांच राज्यों में चुनाव संपन्न होने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शनिवार को अचानक दिल्ली रवाना हो गए। दिल्ली में उनकी मुलाकात गृह मंत्री अमित शाह और राजनाथ सिंह जैसे दिग्गज भाजपा नेताओं से होनी है। माना जा रहा है कि इस दौरे के बाद बिहार कैबिनेट की नई सूची पर अंतिम मुहर लग जाएगी। इससे पहले उन्होंने पटना में जदयू नेता नीतीश कुमार से लंबी बातचीत की।

नीतीश के नए आवास पर हुई अहम चर्चा

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार के सात सर्कुलर रोड स्थित नए आवास पर उनसे मुलाकात की। नीतीश कुमार इसी दिन अपने नए घर में शिफ्ट हुए थे। इस निजी मुलाकात को राजनीतिक हलकों में मंत्रिमंडल विस्तार की अंतिम तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, किसी भी दल ने अभी तक आधिकारिक तौर पर इस बैठक के एजेंडे को लेकर कोई बयान जारी नहीं किया है।

दिल्ली में तय होगा मंत्रियों का भविष्य

दिल्ली दौरे के दौरान सम्राट चौधरी भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के साथ बैठक करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, मंत्रिमंडल के चेहरों को लेकर अंतिम फैसला दिल्ली में ही लिया जाएगा। बिहार में मुख्यमंत्री सहित कुल 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं। ऐसी चर्चा है कि सभी पद एक साथ नहीं भरे जाएंगे। भविष्य के राजनीतिक समीकरणों और क्षेत्रीय संतुलन को साधने के लिए कुछ मंत्री पद खाली रखे जा सकते हैं, ताकि समय आने पर उनका उपयोग हो सके।

भाजपा के नए चेहरे और जदयू के पुराने दिग्गज

मंत्रिमंडल विस्तार के स्वरूप को लेकर राजनीतिक कयासों का दौर जारी है। भाजपा की ओर से संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी इस बार कई नए चेहरों को मौका दे सकती है। भाजपा सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को बनाए रखने पर विशेष जोर दे रही है। वहीं, जदयू अपने पुराने और अनुभवी चेहरों पर ही भरोसा जता सकती है। एनडीए के अन्य घटक दलों में भी अपने पुराने वफादारों को मंत्रिमंडल में शामिल करने की कवायद तेज दिख रही है।

सहयोगी दलों की भूमिका और रालोमो का सस्पेंस

एनडीए के सहयोगी दल जैसे लोजपा (रामविलास) और हम पार्टी अपने कोटे से पुराने मंत्रियों को ही दोबारा मौका दे सकते हैं। सबसे दिलचस्प स्थिति राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) की तरफ से बनती दिख रही है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा का विषय है कि रालोमो अपने कोटे से किसे मंत्री बनाएगी। 15 अप्रैल को शपथ ग्रहण के बाद से ही जनता को इस विस्तार का इंतजार था, जो अब खत्म होता नजर आ रहा है।

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