West Bengal News: पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों का शोर थम चुका है और अब सबकी निगाहें 4 मई को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं। मतदान पूरा होने के बाद सामने आए एग्जिट पोल के आंकड़ों ने बंगाल की राजनीति में खलबली मचा दी है। छह प्रमुख एग्जिट पोल में से चार ने भारतीय जनता पार्टी की जीत का दावा किया है, जबकि केवल दो पोल ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को सत्ता में वापस ला रहे हैं। इन नतीजों ने बंगाल में एक बड़े राजनीतिक बदलाव की ओर इशारा कर दिया है।
देश के राजनीतिक मानचित्र पर बीजेपी का बढ़ता वर्चस्व
मई 2026 तक के आंकड़ों पर गौर करें तो देश का एक बहुत बड़ा हिस्सा बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के शासन में है। वर्तमान में देश के 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 21 पर एनडीए का कब्जा है। यह आंकड़ा भारतीय जनता पार्टी के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव और वर्चस्व को साफ दर्शाता है। हालांकि, राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता, लेकिन बंगाल और असम के संभावित नतीजे बीजेपी की स्थिति को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूत कर सकते हैं।
असम में हैट्रिक और बंगाल में पैठ बनाने की चुनौती
बीजेपी के लिए यह चुनाव बेहद खास है क्योंकि असम में वह जीत की हैट्रिक लगाने की दहलीज पर खड़ी है। यदि एग्जिट पोल के अनुमानों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में भी कमल खिलता है, तो यह पार्टी के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि होगी। आज के दौर में बीजेपी केवल चुनाव नहीं लड़ती, बल्कि वह मुकाबले का नैरेटिव भी खुद तय करती है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे बड़े राज्य पहले से ही पार्टी के अभेद्य दुर्ग बने हुए हैं, जहां उसका प्रदर्शन रिकॉर्ड स्तर पर रहा है।
गुजरात और उत्तर प्रदेश: बीजेपी के सबसे मजबूत सत्ता केंद्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह राज्य गुजरात बीजेपी के लिए सबसे सुरक्षित किला है। साल 2022 के चुनाव में पार्टी ने यहां 182 में से रिकॉर्ड 156 सीटें जीतकर अपनी ताकत दिखाई थी। इसी तरह उत्तर प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने करीब 42 प्रतिशत वोट शेयर के साथ बहुमत हासिल किया था। मध्य प्रदेश में भी 2023 के नतीजों ने पार्टी को 230 में से 163 सीटें दिलाकर उसकी पकड़ को और अधिक पुख्ता कर दिया है।
राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी ढहे विपक्षी किले
हाल के वर्षों में बीजेपी ने उन राज्यों में भी अपनी पकड़ मजबूत की है, जहां कभी कड़ा मुकाबला देखने को मिलता था। राजस्थान और छत्तीसगढ़ इसके ताज़ा उदाहरण हैं। 2023 में राजस्थान में 115 सीटें जीतकर पार्टी ने सत्ता में वापसी की। वहीं, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को करारी शिकस्त देते हुए बीजेपी ने 54 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत हासिल किया। इन राज्यों में पार्टी का बढ़ा हुआ वोट शेयर यह साबित करता है कि जनता का झुकाव अब एक-दलीय वर्चस्व की ओर बढ़ रहा है।
क्या है बीजेपी की निरंतर जीत का असली फॉर्मूला?
विशेषज्ञों का मानना है कि बीजेपी की जीत के पीछे दो प्रमुख कारक हैं; हिंदुत्व की विचारधारा और व्यापक जनकल्याणकारी योजनाएं। ‘लाभार्थी’ वर्ग के साथ पार्टी का सीधा जुड़ाव उसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है। ओडिशा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में, जिन्हें कभी क्षेत्रीय क्षत्रपों का गढ़ माना जाता था, वहां भी बीजेपी ने पिछले 12 सालों में समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। अब देखना होगा कि 4 मई को बंगाल की जनता एग्जिट पोल के इन दावों पर अपनी अंतिम मुहर लगाती है या नहीं।


