शादी का कार्ड छपने से पहले आया शहादत का पैगाम: कांकेर धमाके में शहीद हुए बस्तर फाइटर्स के 4 जांबाज, रुला देगी संजय की कहानी

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में नक्सलियों की बड़ी साजिश को नाकाम करते हुए बस्तर फाइटर्स के चार जवान शहीद हो गए। यह हादसा शनिवार को उस समय हुआ जब सुरक्षा बल के जवान नक्सलियों द्वारा छिपाए गए भारी विस्फोटक को नष्ट कर रहे थे। 2 मई 2026 की इस दोपहर ने चार परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। शहीदों में एक ऐसा जवान भी शामिल था, जिसकी महज 15 दिन पहले ही सगाई हुई थी और घर में जश्न का माहौल था।

75 किलो बारूद के ढेर ने ली चार वीर जवानों की जान

यह भीषण धमाका छोटेबेठिया थाना क्षेत्र के घने जंगलों में हुआ। सुरक्षा बलों को सूचना मिली थी कि नक्सलियों ने भारी मात्रा में विस्फोटक डंप किया है। सर्च ऑपरेशन के दौरान जवानों को 15-15 किलो की पांच बोरियां मिलीं, जिनमें कुल 75 किलो घातक पटाखा पाउडर भरा था। जैसे ही वीर जवानों ने इस जानलेवा मलबे को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू की, अचानक एक जोरदार विस्फोट हुआ। इस धमाके की गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई।

मौके पर ही शहीद हुए तीन जांबाज, एक ने अस्पताल में तोड़ा दम

हादसे की तीव्रता इतनी अधिक थी कि निरीक्षक सुखराम वट्टी, आरक्षक संजय कुमार गढ़पाले और आरक्षक कृष्णा कोमरा मौके पर ही वीरगति को प्राप्त हो गए। वहीं, गंभीर रूप से घायल आरक्षक परमानंद कोर्राम को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। लेकिन उन्होंने रास्ते में ही अंतिम सांस ली। इस दुखद घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। बस्तर फाइटर्स की इस शहादत ने नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों के हौसलों को और अधिक मजबूत कर दिया है।

संजय गढ़पाले: सेहरा सजने से पहले लिपट कर आए तिरंगे में

शहीद आरक्षक संजय कुमार गढ़पाले (29) की कहानी सबसे अधिक हृदयविदारक है। कांकेर के हराडुला गांव के रहने वाले संजय अभी 15 दिन पहले ही पांच दिन की छुट्टी पर घर आए थे। इसी दौरान उनकी सगाई हुई और पूरे घर में लड्डू बांटे गए थे। परिवार ने जनवरी 2027 में उनकी शादी की तारीख भी तय कर दी थी। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। जिस घर में दुल्हन के स्वागत की तैयारी होनी थी, वहां आज मातम पसरा हुआ है।

गांव के लाडले का सपना रह गया अधूरा

संजय के पिता सुरेश गढ़पाले गांव में एक छोटी सी साइकिल स्टोर की दुकान चलाते हैं। संजय ने गरीबी के बावजूद मेहनत की और 2022 में उनका चयन बस्तर फाइटर्स में हुआ। वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारना चाहते थे और उनके सारे सपने पूरे करने का संकल्प लिया था। उनके पिता आज बदहवास हैं और उन्हें विश्वास नहीं हो रहा कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा। पूरे गांव ने नम आंखों से अपने लाडले सपूत को अंतिम विदाई दी।

नक्सली साजिश के खिलाफ जारी रहेगा अभियान

इस हादसे ने एक बार फिर बस्तर के जंगलों में छिपे खतरों को उजागर किया है। नक्सलियों द्वारा डंप किया गया यह विस्फोटक किसी बड़ी तबाही का हिस्सा हो सकता था। सुरक्षा बलों ने स्पष्ट किया है कि जवानों की शहादत बेकार नहीं जाएगी। जंगलों में नक्सलियों के खिलाफ तलाशी अभियान और तेज कर दिया गया है। प्रशासन ने शहीद जवानों के परिवारों को हर संभव सहायता और सम्मान देने का वादा किया है, ताकि उनके बलिदान को सदैव याद रखा जाए।

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