Bihar News: बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) ने अपनी आगामी बहुविकल्पीय (MCQ) आधारित परीक्षाओं की उत्तर प्रणाली में एक क्रांतिकारी बदलाव की घोषणा की है। अब आयोग द्वारा आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं में प्रत्येक प्रश्न के लिए चार के बजाय पांच विकल्प (A, B, C, D और E) दिए जाएंगे। इस नई व्यवस्था के तहत ‘विकल्प ई’ को विशेष महत्व दिया गया है। इसका अर्थ ‘प्रयास नहीं किया गया’ (Non-Attempted) होगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह संशोधित व्यवस्था आगामी सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में तत्काल प्रभाव से लागू कर दी जाएगी।
पुरानी व्यवस्था में था खाली छोड़ने का विकल्प
बीपीएससी की पूर्व व्यवस्था के अनुसार, अभ्यर्थियों को प्रत्येक प्रश्न के लिए केवल चार विकल्प (A, B, C, D) उपलब्ध कराए जाते थे। उस समय किसी भी विकल्प का चयन करना अनिवार्य नहीं था, जिसकी वजह से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी कई प्रश्नों को बिना जवाब दिए ही खाली छोड़ देते थे। आयोग का मानना है कि इससे मूल्यांकन प्रक्रिया और पारदर्शिता में बाधा आती थी। अब सभी परीक्षाओं, जिनमें मल्टीपल च्वाइस प्रश्न (MCQ) पूछे जाते हैं, उनमें विकल्पों की संख्या बढ़ाकर इसे अधिक व्यवस्थित बनाया जा रहा है।
विकल्प ‘ई’ का चयन करना होगा अब अनिवार्य
नई नियमावली के अनुसार, यदि कोई अभ्यर्थी किसी प्रश्न का उत्तर देना चाहता है, तो उसे पहले चार विकल्पों (A, B, C या D) में से किसी एक का चयन करना होगा। हालांकि, यदि अभ्यर्थी को प्रश्न का उत्तर नहीं पता है और वह उसे हल नहीं करना चाहता, तो उसे अनिवार्य रूप से ‘विकल्प ई’ को चुनना होगा। यह प्रावधान इसलिए किया गया है ताकि ओएमआर शीट पर कोई भी प्रश्न बिना किसी निशान के न छूटे और धांधली की गुंजाइश को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।
खाली प्रश्न छोड़ने पर होगी भारी निगेटिव मार्किंग
आयोग ने अनुशासन बनाए रखने के लिए निगेटिव मार्किंग के कड़े नियम लागू किए हैं। यदि कोई अभ्यर्थी पांचों विकल्पों (A, B, C, D, E) में से किसी का भी चयन नहीं करता है और प्रश्न को पूरी तरह खाली छोड़ देता है, तो इसे अनुत्तरित माना जाएगा। ऐसे प्रत्येक प्रश्न के लिए अभ्यर्थी के कुल अंकों में से 1/3 (एक-तिहाई) अंक की कटौती की जाएगी। यानी अब प्रश्न का उत्तर न देने की स्थिति में भी ‘ई’ विकल्प पर गोला बनाना अभ्यर्थी की मजबूरी और जिम्मेदारी दोनों होगी।
पारदर्शिता और मूल्यांकन में सुधार की कोशिश
बीपीएससी द्वारा किया गया यह बदलाव परीक्षा प्रणाली को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस नई व्यवस्था से अभ्यर्थियों को अब ओएमआर शीट भरते समय अधिक सतर्क रहना होगा। यह नियम न केवल प्रारंभिक परीक्षाओं (Prelims) बल्कि उन सभी परीक्षाओं पर लागू होगा जहां वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाते हैं। आयोग के इस फैसले से उन गंभीर छात्रों को लाभ होगा जो पूरी ईमानदारी और सतर्कता के साथ परीक्षा में शामिल होते हैं।


