UAE के OPEC छोड़ने के फैसले ने मचाई खलबली, जानिए कैसे भारत को होने वाला है इसका सबसे बड़ा फायदा

UAE News: संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई ने पेट्रोलियम उत्पादक देशों के संगठन ओपेक और ओपेक प्लस से बाहर निकलने का बहुत बड़ा फैसला लिया है। यूएई का यह ऐतिहासिक फैसला 1 मई 2026 से पूरी तरह से लागू हो जाएगा। इस अचानक हुए ऐलान से पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार में भारी खलबली मच गई है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विशेषज्ञों का साफ तौर पर मानना है कि यूएई के इस कदम का सीधा और सबसे अच्छा फायदा भारत को मिलने वाला है।

भारत और यूएई के बीच ऊर्जा सुरक्षा पर विशेष चर्चा

भारत ने इस बड़े फैसले से पहले ही अपनी रणनीतिक बिसात बिछा दी थी। हाल ही में विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने यूएई का अहम दौरा किया था। यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा और द्विपक्षीय व्यापार पर बहुत सार्थक बातचीत हुई। विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा ने स्पष्ट किया है कि यूएई अब अपनी स्वायत्तता बढ़ाकर भारत जैसे बड़े तेल खरीदारों को निर्बाध सप्लाई देने पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर रहा है।

भारत और एशियाई देशों को मिलेगा सीधा और बड़ा लाभ

ओपेक और ओपेक प्लस जैसे संगठनों के कमजोर होने से भारत समेत कई एशियाई देशों को सीधा लाभ मिलेगा। चीन, दक्षिण कोरिया और जापान को भी सस्ती दरों पर तेल मिल सकेगा। इन सभी देशों को तेल कीमतों पर मोलभाव करने और अपनी ऊर्जा आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए ज्यादा स्वतंत्रता मिलेगी। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव से पहले भी भारत भारी मात्रा में एलपीजी का आयात होर्मुज स्ट्रेट के जरिए मुख्य रूप से यूएई से ही करता आ रहा है।

ग्लोबल एनर्जी बाजार में भारत बना एक निर्णायक मुखिया

यूएई के उद्योग मंत्री सुल्तान अहमद अल जबेर ने भारत की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताया है। दिल्ली दौरे पर उन्होंने स्पष्ट किया था कि वैश्विक ऊर्जा मांग में भारत अब निर्णायक मुखिया बन चुका है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता देश है। अल जबेर ने अनुमान जताया है कि आगामी पंद्रह वर्षों में भारत में हवाई सफर तेजी से बढ़ेगा। इसके कारण भारत में ऊर्जा की कुल मांग में भी एक बड़ी ऐतिहासिक वृद्धि देखने को जरूर मिलेगी।

भारतीय रिफाइनरी कंपनियों का यूएई के साथ मजबूत सहयोग

भारतीय सरकारी रिफाइनरी कंपनियों ने पहले से ही यूएई के साथ अपने व्यापारिक संबंध काफी मजबूत कर लिए हैं। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी प्रमुख कंपनियां यूएई की राष्ट्रीय तेल कंपनी एडनॉक के साथ लगातार काम कर रही हैं। ये सभी सरकारी कंपनियां रिफाइनिंग के क्षेत्र में एक दूसरे का पूरा सहयोग कर रही हैं। यूएई के ओपेक से बाहर होने के बाद इन कंपनियों को तेल आयात में कई तरह की व्यापारिक छूट और बड़ी सहूलियतें मिल सकती हैं।

खाड़ी देशों में भारत की कूटनीति और मजबूत होते रणनीतिक रिश्ते

भारत सरकार यूएई के जरिए खाड़ी क्षेत्र में बहुत संतुलित और मजबूत रणनीतिक रिश्ते कायम करने की नीति पर काम कर रही है। वर्तमान में खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ से ज्यादा भारतीय नागरिक निवास करते हैं। ये प्रवासी भारतीय हर साल भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा भारत भेजते हैं, जिससे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। वर्तमान भू-राजनीतिक हालात और ऊर्जा चिंताओं के बीच भारत और यूएई की यह बढ़ती निकटता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा गेम चेंजर साबित होगी।

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