World News: वैश्विक मंच पर मध्यस्थ बनने का दावा करने वाला पाकिस्तान पाई-पाई को मोहताज है। संयुक्त अरब अमीरात ने अचानक अपने साढ़े तीन अरब डॉलर के कर्ज की तत्काल वापसी की मांग की है। सात वर्षों में यह पहला मौका है जब यूएई ने कर्ज को रोलओवर करने से इनकार किया है। इस कड़े फैसले से पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी संकट मंडराने लगा है। अब कंगाल इस्लामाबाद चीन और सऊदी अरब से तत्काल आर्थिक मदद की भीख मांग रहा है।
सात साल पुरानी व्यवस्था खत्म, यूएई ने अपनाया सख्त रुख
साल दो हजार अठारह से यूएई के तीन अरब डॉलर पाकिस्तान के बैंक में जमा हैं। इस कर्ज को हर साल आगे बढ़ाया जाता था। यूएई का साढ़े चार सौ मिलियन डॉलर का एक अन्य कर्ज भी बकाया है। अब यूएई ने इस महीने के अंत तक पूरे साढ़े तीन अरब डॉलर वापस मांगे हैं। कर्ज चुकाने से पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार बुरी तरह चरमरा जाएगा। पाकिस्तान के पास सिर्फ तीन महीने के आयात लायक ही विदेशी मुद्रा बची है।
कंगाली से बचने के लिए चीन और सऊदी अरब के सामने फैलाई झोली
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ बनने का बड़ा दावा कर रहे थे। लेकिन अब उनका देश फिर से पैसों की भीख मांगने पर मजबूर हो गया है। ब्लूमबर्ग की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, यूएई का भारी कर्ज चुकाने के लिए पाकिस्तान सऊदी अरब और चीन से गुहार लगा रहा है। इस्लामाबाद इन मित्र देशों से साढ़े तीन अरब डॉलर के नए कर्ज की मांग कर रहा है। ताकि भंडार को पूरी तरह खाली होने से बचाया जा सके।
सऊदी अरब से बढ़ती नजदीकियों के कारण यूएई ने दिखाया कड़ा रुख
हाल के महीनों में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच आर्थिक और सुरक्षा संबंध काफी मजबूत हुए हैं। सऊदी अरब ने हाल ही में बताया था कि पाकिस्तान ने रक्षा समझौते के तहत लड़ाकू विमान तैनात किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यूएई पाकिस्तान और सऊदी अरब की इस बढ़ती नजदीकी से खुश नहीं है। हालांकि पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इसे महज एक नियमित वित्तीय लेनदेन करार दिया है। उसने राजनीतिक तनाव की सभी अटकलों को खारिज किया है।
पश्चिम एशिया के बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का पाकिस्तान पर बड़ा असर
पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच जारी टकराव का असर पूरे क्षेत्र पर पड़ रहा है। ईरान ने हाल ही में कई पड़ोसी देशों पर मिसाइल हमले किए हैं। इस तनावपूर्ण माहौल में यूएई का पाकिस्तान से अचानक पैसे वापस मांगना एक कूटनीतिक दबाव माना जा रहा है। यूएई ने खुले तौर पर कर्ज वापसी का कोई ठोस कारण नहीं बताया है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की कमजोर स्थिति अब दुनिया के सामने बेनकाब हो चुकी है।
