नेपाल की नई सरकार का ‘भंसार’ चाबुक, सीमावर्ती भारतीय बाजारों में छाया सन्नाटा, आसमान छू रही महंगाई

Bihar News: नेपाल में सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार के कड़े फैसलों ने सीमावर्ती अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। नेपाली भंसार (कस्टम) की हालिया सख्ती के कारण जहां नेपाल के पहाड़ी इलाकों में महंगाई 45 प्रतिशत तक बढ़ गई है, वहीं बिहार के रक्सौल, सीतामढ़ी और जयनगर जैसे प्रमुख सीमावर्ती बाजारों की रौनक गायब हो गई है। 100 रुपये से अधिक की खरीदारी पर भंसार की अनिवार्यता ने व्यापारिक संबंधों और आम जनजीवन पर गहरा असर डाला है।

रक्सौल के बाजारों में 15 करोड़ का भारी नुकसान

नेपाल सरकार द्वारा करीब तीन सप्ताह पहले लागू किए गए इस सख्त नियम के कारण रक्सौल के व्यापारियों को बड़ा झटका लगा है। चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अनुसार, पिछले 20 दिनों में कपड़ा, किराना, मेवा और फल कारोबार में करीब 12 से 15 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। पहले जहां हर दिन आठ से दस हजार नेपाली ग्राहक खरीदारी के लिए आते थे, अब यह संख्या सिमटकर महज 100 से 200 रह गई है, जिससे बाजारों में सन्नाटा पसरा है।

कीमतों में भारी अंतर से आम आदमी बेहाल

भारत और नेपाल के बीच आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में अब जमीन-आसमान का अंतर आ गया है। रक्सौल में जो चीनी 45 रुपये किलो है, वही नेपाल के परसा और बारा जिलों में 60 रुपये तक बिक रही है। सरसों तेल के दाम भारत में 175 रुपये हैं, जबकि नेपाल में यह 225 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। सूखे मेवों की बात करें तो काजू, किशमिश और बादाम की कीमतों में प्रति किलो 100 से 300 रुपये तक का बड़ा भावांतर दर्ज किया जा रहा है।

सीतामढ़ी और जयनगर की व्यापारिक स्थिति नाजुक

सीतामढ़ी जिले के प्रमुख सीमावर्ती बाजारों जैसे बैरगनिया, सोनबरसा और भिट्ठामोड़ में भी ग्राहकों का टोटा हो गया है। रोजमर्रा के सामान, विशेषकर चावल और दाल की खरीदारी के लिए आने वाले नेपाली ग्राहक अब नहीं दिख रहे हैं। जयनगर से सटे नेपाल के सिरहा और माड़र क्षेत्रों के निवासियों का कहना है कि महंगाई के कारण मध्यम वर्ग का जीना मुहाल हो गया है। सरकार के इस फैसले से पर्यटन बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन फिलहाल व्यापारिक और आवाजाही पूरी तरह प्रभावित है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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