Delhi News: लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पास नहीं हो सका। इसके बाद देश की राजनीति तेज हो गई है। दिल्ली विधानसभा का विशेष सत्र 28 अप्रैल को बुलाया गया है। यह सत्र फिलहाल एक दिन का होगा। इसमें महिला आरक्षण पर विस्तार से चर्चा होगी। बिल का विरोध करने पर विपक्ष की निंदा की जाएगी। सत्ता पक्ष निंदा प्रस्ताव लाने की तैयारी कर चुका है। इस कदम से दिल्ली का सियासी पारा काफी चढ़ गया है।
विपक्ष पर महिलाओं को धोखा देने का आरोप
भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष पर जोरदार हमला बोला है। पार्टी ने विपक्ष पर महिलाओं को धोखा देने का आरोप लगाया है। भाजपा शासित कई राज्यों में भी ऐसे विशेष सत्र बुलाए गए हैं। वहां भी इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी। दिल्ली विधानसभा का यह सत्र मंगलवार को सुबह ग्यारह बजे शुरू होगा। उपराज्यपाल ने इस सत्र को शुरू करने की मंजूरी दे दी है। विधानसभा सचिवालय ने इसके लिए अधिसूचना भी जारी कर दी है।
लोकसभा में क्यों गिर गया था यह बिल?
यह सत्र जरूरत पड़ने पर आगे बढ़ाया जा सकता है। सरकार 2029 में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना चाहती थी। बिल में लोकसभा सीटें बढ़ाने का भी प्रस्ताव था। लेकिन यह संशोधन बिल इसी महीने लोकसभा में गिर गया। कांग्रेस और विपक्षी दलों ने बिल के खिलाफ वोट किया था। विपक्ष का आरोप था कि सरकार का असली एजेंडा अलग है। वे सरकार पर जाति जनगणना से पहले परिसीमन करने का आरोप लगा रहे थे।
सदन में बहुमत साबित करने में रही कमी
लोकसभा में इस बिल के समर्थन में 298 सदस्यों ने वोट दिया था। वहीं 230 सांसदों ने इस बिल के खिलाफ मतदान किया। सदन में कुल 528 सदस्यों ने वोटिंग प्रक्रिया में हिस्सा लिया था। बिल पास करने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी। इसके लिए सरकार को 352 वोटों की दरकार थी। आंकड़े पूरे नहीं होने के कारण बिल पास नहीं हो सका। अब इस मुद्दे को लेकर राज्यों की विधानसभाओं में बहस शुरू हो गई है।
बम की धमकियों के बीच सुरक्षा के कड़े इंतजाम
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सत्र को लेकर जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि पुराने सत्र का तत्काल प्रभाव से समापन हो गया है। इसके बाद नए सत्र के लिए रास्ता साफ हो गया है। विधानसभा सचिवालय ने विशेष सत्र के लिए सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर ली हैं। हाल ही में विधानसभा परिसर को बम से उड़ाने की धमकियां मिली थीं। इसे देखते हुए परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बहुत कड़ी कर दी गई है।
विधायकों और कर्मचारियों की सुरक्षा पर विशेष जोर
अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा में कोई चूक नहीं होगी। सदन के सभी सदस्यों और कर्मचारियों की हिफाजत सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है। सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं। राजनीतिक हंगामे के बीच यह सत्र काफी अहम होने वाला है। दिल्ली की जनता की नजरें भी इस विशेष एक दिवसीय सत्र पर टिकी हुई हैं।
