एलपीजी के बिना जल रही रसोई की आंच, सहारनपुर का यह ‘स्मार्ट गांव’ बना दुनिया के लिए मिसाल

Uttar Pradesh News: वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले का थरौली गांव आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहा है। यहां के ग्रामीण अब रसोई गैस के लिए महंगे एलपीजी सिलिंडर पर निर्भर नहीं हैं। ग्राम प्रधान रीटा चौधरी के नेतृत्व में गांव ने वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को अपनाकर खुद को एक ‘स्मार्ट विलेज’ में तब्दील कर लिया है। आधे से अधिक घरों में अब बायोगैस से खाना बन रहा है और बिजली की जरूरतों के लिए छतों पर सोलर पैनल चमक रहे हैं।

बायोगैस और सौर ऊर्जा से ईंधन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता

गांव में बायोगैस क्रांति की शुरुआत करीब 10 साल पहले हुई थी। प्रधान की पहल और सीएसआर फंड के सहयोग से मात्र 6,000 रुपये में बायोगैस प्लांट तैयार हो जाता है। ग्रामीणों ने बेसहारा पशुओं को भी आश्रय दिया है, जिससे प्लांट के लिए पर्याप्त गोबर उपलब्ध रहता है। सौर ऊर्जा के बढ़ते इस्तेमाल और 100 से अधिक इलेक्ट्रिक स्कूटियों की मौजूदगी ने पेट्रोल-डीजल पर गांव की निर्भरता को न्यूनतम कर दिया है। यह मॉडल अब पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में मिसाल बन गया है।

योगी लेक: वर्षा जल संचय और भूजल रिचार्ज का सफल मॉडल

थरौली में कभी गंदगी से भरा रहने वाला तालाब आज ‘योगी लेक’ के रूप में युवाओं के लिए नौकायन का केंद्र है। करीब 22 लाख रुपये की लागत से पुनर्जीवित हुई यह झील 129 करोड़ लीटर पानी संचय करने की क्षमता रखती है। यह सालाना खपत से कहीं अधिक पानी स्टोर कर भूजल को रिचार्ज कर रही है। खास बात यह है कि ग्राम प्रधान ने पुरस्कार राशि के साथ-साथ अपनी निजी पूंजी निवेश कर इस परियोजना को साकार किया है।

डिजिटल सुरक्षा और हाई-टेक लाइब्रेरी से सशक्त हो रही युवा पीढ़ी

शिक्षा के क्षेत्र में भी थरौली अग्रणी है। यहां जिले की पहली अत्याधुनिक लाइब्रेरी बनाई गई है, जो वाई-फाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों से सुसज्जित है। सुरक्षा के लिहाज से पूरे गांव में 32 क्लाउड-बेस्ड सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। सूचना प्रसारण के लिए मोबाइल से कनेक्टेड ‘पब्लिक एड्रेस सिस्टम’ का इस्तेमाल होता है। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि गांव का कोई भी कोना निगरानी और सूचना से वंचित न रहे, जिससे ग्रामीण व्यवस्था में शहरी स्तर की सुरक्षा मिलती है।

28 राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित हुआ थरौली का विकास मॉडल

थरौली की उपलब्धियों को देखते हुए अब तक इसे मुख्यमंत्री पंचायत पुरस्कार समेत 28 राष्ट्रीय अवार्ड मिल चुके हैं। गांव की सफलता देखने के लिए देश-विदेश से प्रतिनिधिमंडल यहां पहुंचते हैं। यह गांव साबित करता है कि स्थानीय संसाधनों और दूरदर्शी नेतृत्व के समन्वय से किसी भी ग्रामीण क्षेत्र को कॉर्पोरेट मॉडल की तरह विकसित किया जा सकता है। ग्रामीणों की भागीदारी और नवाचार ने इस गांव को खेती और पशुपालन के पारंपरिक दायरे से बाहर निकालकर अवसर का केंद्र बना दिया है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
/ month
placeholder text

Hot this week

Topics

Related Articles

Popular Categories