Middle East News: ईरान की आंतरिक राजनीति में एक बड़ा भूचाल देखने को मिल रहा है। अमेरिका के साथ चल रहे भीषण युद्ध के बीच सत्ता के समीकरण पूरी तरह से बदल गए हैं। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने अब ईरान की सत्ता पर अपना पूर्ण और सीधा नियंत्रण स्थापित कर लिया है। नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के अधिकार अब सीमित नजर आ रहे हैं। इस नाटकीय बदलाव ने पूरी दुनिया की कूटनीति में हलचल मचा दी है।
आईआरजीसी का बढ़ता प्रभाव और सत्ता पर कब्जा
ईरान में सेना और धार्मिक नेतृत्व के बीच का संतुलन अब सेना के पक्ष में झुक गया है। विश्लेषकों का मानना है कि आईआरजीसी अब केवल एक सैन्य बल नहीं, बल्कि ईरान का मुख्य सत्ता केंद्र बन चुकी है। अली खामेनेई की मौत के बाद पैदा हुए संकट का फायदा उठाकर इस सैन्य संगठन ने सभी रणनीतिक फैसलों को अपने अधीन कर लिया है। अब देश की सुरक्षा से लेकर आर्थिक नीतियों तक में सेना का ही सीधा दखल है।
मोजतबा खामेनेई की घटती ताकत और सेना का नियंत्रण
नए सर्वोच्च नेता के रूप में मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति केवल एक दिखावा मात्र लग रही है। रिपोर्टों के अनुसार, आईआरजीसी ने उन्हें सत्ता के शीर्ष पर सिर्फ इसलिए बैठाया है ताकि वे सेना के एक मोहरे की तरह काम कर सकें। मोजतबा के पास वह धार्मिक और जनसमर्थन नहीं है जो उनके पिता के पास हुआ करता था। इस कारण उन्हें हर बड़े फैसले के लिए आईआरजीसी के कमांडरों पर पूरी तरह से निर्भर रहना पड़ रहा है।
युद्ध की स्थिति में सैन्य जनरलों की बड़ी भूमिका
अमेरिका और इसराइल के साथ चल रहे सीधे टकराव ने ईरान की अंदरूनी राजनीति को नया रूप दिया है। इस युद्ध काल में आईआरजीसी का मानना है कि नागरिक या धार्मिक नेतृत्व मौजूदा चुनौतियों का सामना नहीं कर सकता है। इसलिए संगठन ने देश की रक्षा और विदेश नीति की कमान सीधे अपने हाथों में ले ली है। मोजतबा को किनारे करने की रणनीति इसी सैन्य नियंत्रण का एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है।
वैश्विक राजनीति पर ईरान के सत्ता परिवर्तन का असर
ईरान में आईआरजीसी के इस सीधे नियंत्रण का मध्य पूर्व के पूरे परिदृश्य पर गहरा असर पड़ेगा। पश्चिमी देशों के विशेषज्ञ इस स्थिति को लेकर बहुत अधिक चिंतित नजर आ रहे हैं। एक सैन्य संगठन के पूर्ण नियंत्रण वाले ईरान से कूटनीतिक बातचीत करना अब और भी मुश्किल हो जाएगा। यह स्पष्ट है कि ईरान अब अधिक आक्रामक सैन्य नीतियां अपनाएगा, जिससे भविष्य में इस युद्ध का दायरा कई अन्य खाड़ी देशों तक बुरी तरह से फैल सकता है।
