International News: पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की सीधी बातचीत की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया है कि जब तक वाशिंगटन अपनी ‘दुश्मनाना हरकतें’ और नौसैनिक नाकाबंदी खत्म नहीं करता, तब तक ईरान समझौते की मेज पर नहीं बैठेगा। उन्होंने यह सख्त संदेश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ फोन पर हुई बातचीत के दौरान दिया है।
दबाव और धमकियों के बीच समझौता नामुमकिन
राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से कहा कि ईरान दबाव, धमकियों या आर्थिक नाकाबंदी के साये में किसी भी संवाद का हिस्सा नहीं बनेगा। प्रेस टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी राष्ट्रपति का मानना है कि शांति की राह में असली बाधा बातचीत की कमी नहीं, बल्कि अमेरिका की दमनकारी नीतियां हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक अमेरिका अपनी सैन्य और आर्थिक रुकावटें नहीं हटाता, तब तक दोनों देशों के बीच भरोसा बहाल करना पूरी तरह असंभव है।
आठ हफ्तों से जारी है अमेरिकी नाकाबंदी
ईरान का यह कड़ा रुख ऐसे समय में आया है जब पिछले आठ हफ्तों से दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है। 13 अप्रैल से अमेरिका ने ईरान के प्रमुख बंदरगाहों पर पूर्ण नौसैनिक नाकाबंदी लगा रखी है। इस कार्रवाई से ईरानी अर्थव्यवस्था को गहरा आघात पहुंचा है। इससे पहले इस्लामाबाद में शुरू हुई मध्यस्थता की कोशिशें भी बेनतीजा रही हैं। ईरान ने साफ कर दिया है कि बातचीत के लिए अनुकूल माहौल तभी बनेगा जब सभी प्रतिबंध हटा लिए जाएंगे।
ट्रंप ने ठुकराया ईरान का नया प्रस्ताव
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के हालिया प्रस्ताव को ‘अपर्याप्त’ करार दिया है। ट्रंप ने अपने विशेष दूतों की पाकिस्तान यात्रा रद्द करते हुए कहा कि अमेरिका की मुख्य मांग में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने का विचार पूरी तरह त्याग दे। हालांकि ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची एक “व्यावहारिक रूपरेखा” के साथ मध्यस्थता की कोशिशों में जुटे हैं, लेकिन फिलहाल दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिरोध बरकरार है।
