Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मैदानी इलाकों में भीषण गर्मी ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार बढ़ते पारे के बीच अब स्कूलों की समय-सारणी बदलने की मांग तेज हो गई है। हिमाचल प्रदेश स्कूल लेक्चरर संघ ने प्रदेश सरकार से गुहार लगाई है कि छात्रों के गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए स्कूल टाइमिंग में तत्काल बदलाव किया जाए। वर्तमान में सुबह 9 बजे स्कूल लगने से बच्चों को चिलचिलाती धूप में सफर करना पड़ रहा है।
बढ़ता पारा बना मुसीबत और स्कूलों में भारी परेशानी
स्कूल लेक्चरर संघ के प्रांतीय मुख्य मीडिया सचिव राजन शर्मा ने बताया कि वर्तमान समय-सारणी अब व्यावहारिक नहीं रह गई है। सुबह 9 बजे तक धूप काफी तेज हो जाती है और तापमान तेजी से ऊपर चढ़ने लगता है। इसके कारण कक्षाओं के भीतर छात्रों और शिक्षकों का बैठना भी दूभर हो गया है। भीषण गर्मी का सीधा असर बच्चों की एकाग्रता और उनकी पढ़ाई पर पड़ रहा है। शिक्षक संघ ने सरकार से इस ओर ध्यान देने का अनुरोध किया है।
ऊना और कांगड़ा समेत इन इलाकों में रेड अलर्ट जैसे हालात
राजन शर्मा ने विशेष रूप से प्रदेश के निचले और मैदानी इलाकों की गंभीर स्थिति पर प्रकाश डाला है। उन्होंने कहा कि ऊना, कांगड़ा, बद्दी और नालागढ़ जैसे क्षेत्रों में गर्मी का प्रकोप सबसे अधिक देखा जा रहा है। इन जिलों में पारा सामान्य से काफी ऊपर चला गया है। लू चलने की संभावनाओं को देखते हुए इन विशिष्ट क्षेत्रों के स्कूलों के लिए अलग और राहतकारी समय-सारणी लागू करना अब सुरक्षा की दृष्टि से अनिवार्य हो गया है।
शिक्षक संघ का बड़ा सुझाव और अभिभावकों का समर्थन
लेक्चरर संघ ने सरकार को ठोस सुझाव देते हुए कहा है कि स्कूलों का समय सुबह जल्दी (Early Morning) किया जाना चाहिए। इससे छात्र भीषण दोपहर से पहले सुरक्षित अपने घर पहुंच सकेंगे। इस मांग को अभिभावकों का भी भरपूर समर्थन मिल रहा है। अभिभावकों का मानना है कि बच्चों की सुरक्षा और सेहत उनकी पहली प्राथमिकता है। सरकार के शीघ्र निर्णय लेने से हजारों विद्यार्थियों को गर्मी की मार से बचने में बड़ी मदद मिलेगी।
स्वास्थ्य पर मंडराता खतरा और प्रशासनिक सक्रियता की उम्मीद
प्रदेश के निचले इलाकों में बढ़ते तापमान के कारण स्कूली बच्चों में डिहाइड्रेशन और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ गया है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो स्कूलों में हाजिरी कम हो सकती है। अब सबकी नजरें शिक्षा विभाग और जिला प्रशासनों पर टिकी हैं। लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन इस मुद्दे पर जल्द कोई ठोस अधिसूचना जारी करेगा ताकि छात्रों का स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके।
