World News: दुनियाभर में कोविड-19 टीकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बड़ी बहस छिड़ गई है। मशहूर कारोबारी एलन मस्क ने वैक्सीन की दूसरी डोज के बाद अपनी हालत बिगड़ने का दावा किया है। उनका यह बयान एक पुराने वायरल वीडियो के सामने आने के बाद आया है। इस वीडियो में एक जर्मन डॉक्टर हेलमुट स्टर्ज वैक्सीन परीक्षणों पर गंभीर सवाल उठाते दिख रहे हैं। इससे सोशल मीडिया पर नई बहस शुरू हो गई है।
मस्क के दावे से भड़की नई बहस
उद्योगपति एलन मस्क के हालिया बयान ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। मस्क ने बताया कि कोविड वैक्सीन की दूसरी खुराक के बाद उन्हें भयानक अनुभव हुआ। उन्हें लगा कि उनकी तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो रही है। इस दावे ने वैक्सीन पर पुरानी चर्चा को फिर से हवा दे दी है। मस्क ने सवाल उठाया कि टीकों के संभावित खतरों को लेकर दुनिया भर में व्यापक चर्चा क्यों नहीं होती।
जर्मन संसद का वायरल वीडियो
मस्क का यह बयान एक वायरल वीडियो के ठीक बाद सामने आया है। इस वीडियो में डॉ. हेलमुट स्टर्ज जर्मन संसद की एक अहम समिति के सामने गवाही दे रहे हैं। उन्होंने बड़ा दावा किया कि टीकों को मंजूरी देने से पहले जरूरी परीक्षण पूरे नहीं किए गए थे। स्टर्ज ने कहा कि कैंसर के जोखिम और प्रजनन क्षमता पर वैक्सीन के असर का पर्याप्त अध्ययन बिल्कुल नहीं हुआ। यह वीडियो अब इंटरनेट पर तेजी से शेयर हो रहा है।
डॉक्टर स्टर्ज के दावों की सच्चाई
डॉ. स्टर्ज पहले एक नामी दवा कंपनी के विष विज्ञान विभाग में काम करते थे। हालांकि, वह कोविड महामारी से बहुत पहले वर्ष 2007 में ही सेवानिवृत्त हो चुके थे। उन्होंने अपनी गवाही में 2133 मौतों का प्रमुखता से जिक्र किया। ये मौतें जर्मनी में टीकाकरण अभियान के बाद दर्ज की गई थीं। स्टर्ज ने अनुमान लगाया कि असली आंकड़ा इससे काफी ज्यादा हो सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों ने उनके इस दावे को खारिज किया है और इसे अवैज्ञानिक बताया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने किया खंडन
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने साफ किया है कि टीकाकरण के बाद मौत का मतलब वैक्सीन से मौत होना नहीं है। किसी घटना का रिपोर्ट होना और उसका सीधा कारण वैक्सीन होना, दोनों बहुत अलग बातें हैं। यूरोप की दवा नियामक एजेंसियों ने टीकों को पूरी तरह सुरक्षित बताया है। उन्होंने कहा कि टीकों के फायदे उनके जोखिमों से कहीं अधिक हैं। वैश्विक स्वास्थ्य संस्थाओं के शोध बताते हैं कि ज्यादा टीकाकरण वाले क्षेत्रों में मौतें कम रही हैं।
टीकों ने बचाई करोड़ों जानें
कुछ दुर्लभ मामलों में वैक्सीन के बाद दिल में सूजन की समस्या सामने आई है। लेकिन ऐसे मामलों की संख्या बहुत ही कम रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक कोविड संक्रमण से ऐसी बीमारियों का खतरा बहुत अधिक होता है। वैज्ञानिक समुदाय लगातार इन दावों पर गहन अध्ययन कर रहा है। मौजूदा आंकड़े यही साबित करते हैं कि वैक्सीन ने दुनियाभर में महामारी के दौरान करोड़ों लोगों की जान बचाने का काम किया है।
