सुंदरनगर अस्पताल में 8 दिन की नवजात की मौत, रात के अंधेरे में स्टाफ की लापरवाही बनी काल?

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के सुंदरनगर सिविल अस्पताल से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां महज 8 दिन की एक मासूम नवजात बच्ची ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया है। इस दुखद मौत के बाद बच्ची के परिजनों में भारी रोष है। उन्होंने अस्पताल के रात्रि ड्यूटी स्टाफ पर घोर लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए हैं। घटना ने स्वास्थ्य सुविधाओं और मरीजों की सुरक्षा पर कई बड़े और तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।

पीलिया के इलाज के लिए किया था भर्ती

परिजनों के अनुसार उन्होंने अपनी नवजात बच्ची को 11 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती करवाया था। बच्ची को पीलिया की शिकायत थी। डॉक्टरों की सलाह पर उसे अस्पताल के फोटोथैरेपी वार्ड में रखा गया था। परिजनों का सीधा आरोप है कि रात के समय वार्ड में मौजूद नर्सिंग स्टाफ ने बच्ची की बिल्कुल भी देखभाल नहीं की। रात के अंधेरे में स्टाफ अपनी जिम्मेदारी भूल गया। इसी लापरवाही के कारण मासूम बच्ची की हालत लगातार बिगड़ती चली गई।

ड्रिप हटने पर भी स्टाफ ने नहीं दिया ध्यान

शिकायतकर्ताओं ने बताया कि रात के समय मासूम बच्ची ने दो बार अपनी ड्रिप हटा दी थी। परिजनों ने तुरंत इसकी जानकारी ड्यूटी पर तैनात स्टाफ को दी। इसके बावजूद किसी भी कर्मचारी ने समय पर ड्रिप को ठीक नहीं किया। इसके अलावा फोटोथैरेपी वार्ड का तापमान भी बच्ची के स्वास्थ्य के अनुकूल नहीं था। सही तापमान न होने और समय पर इलाज न मिलने से नवजात का शरीर कमजोर पड़ गया और उसकी सांसें थम गईं।

सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज हुई सख्त शिकायत

इस दर्दनाक घटना के बाद पीड़ित परिवार ने न्याय की गुहार लगाई है। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ भारी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने मुख्यमंत्री सेवा संकल्प हेल्पलाइन 1100 पर अपनी औपचारिक शिकायत दर्ज करवा दी है। परिवार का स्पष्ट कहना है कि अगर रात के समय चिकित्सा कर्मियों ने अपना फर्ज निभाया होता तो उनकी बच्ची आज जिंदा होती। इस शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है और सख्त कार्रवाई की मांग है।

अस्पताल प्रशासन ने दिए गहन जांच के आदेश

मामले के तूल पकड़ने के बाद सिविल अस्पताल सुंदरनगर के प्रशासन ने अपना पक्ष रखा है। प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ चमन सिंह ठाकुर ने बताया कि बच्ची का इलाज पूरी सावधानी से चल रहा था। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से बच्ची को बचाया नहीं जा सका। डॉ ठाकुर ने स्पष्ट किया है कि उन्हें अभी लिखित शिकायत नहीं मिली है लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए एक निष्पक्ष और गहन जांच जरूर करवाई जाएगी।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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