West Bengal News: पश्चिम बंगाल में गरीबों के निवाले पर डाका डालने वाले राशन घोटाले (PDS Scam) के संगठित नेटवर्क के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। 25 अप्रैल 2026 को ईडी की कोलकाता जोनल टीम ने कोलकाता, हावड़ा और बर्धमान के 11 अलग-अलग ठिकानों पर सघन छापेमारी की। यह कार्रवाई मुख्य आरोपी निरंजन चंद्र साहा और उसके सहयोगियों से जुड़े परिसरों पर की गई, जहां से जांच एजेंसी ने 18.4 लाख रुपये नकद, डिजिटल साक्ष्य और कई चौंकाने वाले दस्तावेज बरामद किए हैं। ईडी के अनुसार, यह घोटाला मनी लॉन्ड्रिंग के एक गहरे और संगठित तंत्र की ओर इशारा करता है।
बसीरहाट से शुरू हुई जांच ने खोला अंतरराष्ट्रीय स्मगलिंग का राज
इस विशाल घोटाले की जांच की नींव पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा बसीरहाट थाने में दर्ज की गई एक एफआईआर से पड़ी थी। घोजाडांगा लैंड कस्टम्स स्टेशन (LCS) के डिप्टी कमिश्नर की शिकायत पर यह मामला दर्ज हुआ था। जांच में यह बेहद गंभीर खुलासा हुआ कि गरीबों के लिए आवंटित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का गेहूं न केवल गबन किया गया, बल्कि उसे अवैध तरीके से सरहद पार बांग्लादेश निर्यात कर दिया गया। सरकारी अनाज की पहचान मिटाने के लिए आरोपियों ने एक पूरी समानांतर व्यवस्था बना रखी थी।
FCI के निशानों को मिटाकर सरकारी गेहूं की नई पैकेजिंग का खेल
ईडी की जांच में सामने आया कि आरोपी सिंडिकेट सरकारी गेहूं को अवैध रूप से कौड़ियों के दाम पर खरीदता था। इसके बाद उन बोरियों से एफसीआई (FCI) और अन्य सरकारी मोहरों को हटा दिया जाता या बोरियों को उल्टा कर दिया जाता था ताकि उनकी पहचान छिपाई जा सके। इसी गेहूं को नई पैकेजिंग में भरकर खुले बाजार और विदेशों में ऊंचे दामों पर बेचकर करोड़ों का मुनाफा कमाया जाता था। इस पूरे खेल में सरकारी खजाने को भारी चपत लगाई गई और राशन की कालाबाजारी की गई।
175 ट्रकों में लदा 5,100 मीट्रिक टन गेहूं बरामद, संगठित तंत्र का पर्दाफाश
जांच एजेंसियों ने छापेमारी के दौरान करीब 175 ट्रकों में लदा 5,101.25 मीट्रिक टन PDS गेहूं बरामद किया है। इस संगठित नेटवर्क में एक्सपोर्टर, थोक व्यापारी, ट्रांसपोर्टर और कमीशन एजेंटों की गहरी मिलीभगत पाई गई है। पुलिस ने निरंजन चंद्र साहा, साहाबुद्दीन शेख और शाहिदुर रहमान के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। बरामद दस्तावेजों में बड़ी संख्या में फर्जी बिल, चालान और जीएसटी इनवॉइस मिले हैं, जिनका इस्तेमाल इस गैरकानूनी व्यापार को वैध दिखाने के लिए किया जा रहा था।
पूर्व मंत्री ज्योति प्रिय मलिक समेत 9 गिरफ्तार, 75 करोड़ की संपत्ति जब्त
इस घोटाले की आंच बंगाल की राजनीति तक पहुंच चुकी है, जिसमें अब तक पूर्व मंत्री ज्योति प्रिय मलिक और बकीबुर रहमान सहित 9 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। ईडी अब तक 75 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां कुर्क (Attach) कर चुकी है। जांच में सामने आया कि राशन वितरण में हेराफेरी, पुराने आटे की मिलावट और फर्जी किसानों के नाम पर एमएसपी हड़पने जैसे हथकंडे अपनाए गए थे। 10 और 25 अप्रैल की हालिया कार्रवाइयों को मिलाकर अब तक कुल 49.3 लाख रुपये नकद जब्त किए जा चुके हैं।
गरीबों के हक पर डाका डालने वालों के खिलाफ और बढ़ेगा शिकंजा
प्रवर्तन निदेशालय का स्पष्ट कहना है कि यह पूरा नेटवर्क राज्य के सबसे गरीब तबके के हक पर डाका डाल रहा था। सप्लाई चेन में घुसपैठ कर सरकारी अनाज को ब्लैक मार्केट में डायवर्ट किया गया। सप्लायरों और बिचौलियों की मिलीभगत से यह सिंडिकेट कई जिलों में अपनी जड़ें जमा चुका था। एजेंसी को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़े सफेदपोशों के नाम सामने आ सकते हैं, जिससे इस घोटाले की रकम और बढ़ सकती है।
