कॉर्बेट के ‘विक्रम’ का अंत: तीन वनकर्मियों पर हमला करने वाला सबसे बुजुर्ग बाघ शांत, 21 साल की उम्र में मौत

Uttarakhand News: उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क से एक दुखद खबर सामने आई है। ढिकाला रेंज का सबसे उम्रदराज और चर्चित बाघ ‘विक्रम’ अब इस दुनिया में नहीं रहा। शनिवार रात ढेला स्थित रेस्क्यू सेंटर में इस बुजुर्ग बाघ ने अंतिम सांस ली। विक्रम की उम्र लगभग 21 वर्ष बताई जा रही है, जो एक बाघ के औसत जीवनकाल से काफी अधिक है। कॉर्बेट प्रशासन के अनुसार, वह पिछले काफी समय से वृद्धावस्था संबंधी समस्याओं से जूझ रहा था और रेस्क्यू सेंटर में विशेषज्ञों की देखरेख में था।

खौफनाक अतीत और तीन हत्याओं का दाग

बाघ विक्रम का इतिहास काफी संघर्षपूर्ण और विवादित रहा है। ढिकाला क्षेत्र में सक्रिय रहने के दौरान इस बाघ ने गश्त कर रहे तीन वन कर्मियों पर जानलेवा हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया था। इन घटनाओं के बाद वन विभाग ने इसे ‘आदमखोर’ घोषित करने के बजाय रेस्क्यू करने का निर्णय लिया। 3 मई 2019 को कड़ी मशक्कत के बाद इसे पकड़कर नैनीताल चिड़ियाघर भेजा गया था। हालांकि, अपनी ताकत और अदम्य साहस के कारण वह वहां भी चर्चा में रहा।

पिंजरा तोड़कर बाहर आने का दुस्साहस

नैनीताल चिड़ियाघर में प्रवास के दौरान विक्रम ने अपनी शारीरिक शक्ति का परिचय देते हुए लोहे का पिंजरा तोड़ दिया था। इस घटना के बाद सुरक्षा कारणों से उसे वापस कॉर्बेट पार्क के ढेला स्थित नवनिर्मित रेस्क्यू सेंटर में स्थानांतरित कर दिया गया। 20 अप्रैल 2021 से वह यहीं एकांतवास में अपनी जिंदगी बिता रहा था। उम्र बढ़ने के साथ विक्रम की सुनने की क्षमता पूरी तरह खत्म हो गई थी, लेकिन उसकी दहाड़ और मौजूदगी आज भी रेस्क्यू सेंटर के कर्मचारियों के लिए विशेष थी।

कैंसर से जंग और सफल ऑपरेशन

पिछले साल 2025 में विक्रम के शरीर में ट्यूमर (कैंसर) का पता चला था, जिसके बाद उसका जटिल ऑपरेशन किया गया। उस समय अनुभवी पशु चिकित्सकों की टीम ने उसका सफल इलाज किया और वह पूरी तरह स्वस्थ हो गया था। हालांकि, शनिवार रात अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। कॉर्बेट के वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दुष्यंत शर्मा ने बताया कि प्रारंभिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, बाघ की मृत्यु हृदयघात (हार्ट अटैक) के कारण हुई है।

राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई

बाघ विक्रम के शव का पोस्टमार्टम कॉर्बेट के निदेशक डॉ. साकेत बडोला के मार्गदर्शन में किया गया। पोस्टमार्टम पैनल में नैनीताल चिड़ियाघर के डॉ. हिमांशु पांगती और अन्य विशेषज्ञ शामिल रहे। इस दौरान उपनिदेशक राहुल मिश्रा सहित एनटीसीए के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, एनटीसीए के नियमों का पालन करते हुए बाघ के अवशेषों को रेस्क्यू सेंटर परिसर में ही अग्नि को समर्पित कर दिया गया। वन विभाग ने इस बाघ की मौत को एक युग का अंत बताया है।

Hot this week

IMD Weather Alert: दिल्ली-एनसीआर से बिहार तक आंधी-तूफान और भारी बारिश की चेतावनी

National News: भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने देश...

Related News

Popular Categories