Bageshwar News: उत्तराखंड में हवाई सेवाओं के प्रबंधन को लेकर एक बेहद अजीबोगरीब और लापरवाही भरा मामला सामने आया है। बागेश्वर के मेलाडुंगरी हेलीपैड से देहरादून के लिए उड़ान भरने वाले सात यात्रियों को तकनीकी चूक के कारण हल्द्वानी उतार दिया गया। जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि यात्रियों का गंतव्य (डेस्टिनेशन) देहरादून था, लेकिन उन्हें बोर्डिंग पास और फ्लाइट नंबर हल्द्वानी का जारी कर दिया गया। इस गंभीर गलती की वजह से यात्री दिन भर परेशान रहे और गलत स्थान पर उतरने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए।
बोर्डिंग पास और फ्लाइट नंबर में भारी चूक
इस पूरे प्रकरण की जांच तहसीलदार निशा रानी द्वारा की गई, जिसकी रिपोर्ट जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे को भेज दी गई है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, हेरिटेज एविएशन द्वारा यात्रियों को जो बोर्डिंग पास दिए गए थे, उन पर गंतव्य स्थल हल्द्वानी दर्ज था। तकनीकी फाल्ट की वजह से फ्लाइट का नंबर भी बदल गया था। हैरानी की बात यह रही कि न तो विमानन कंपनी के कर्मचारियों ने इस पर ध्यान दिया और न ही यात्रियों ने बोर्डिंग पास को ध्यान से पढ़ा।
दिन भर भटकते रहे यात्री, प्रशासन ने लिया संज्ञान
यह घटना शुक्रवार की है, जिसके बाद काफी हंगामा हुआ। शुरुआत में हेरिटेज एविएशन के कर्मचारी अपनी गलती मानने से बचते रहे, लेकिन मामला जिलाधिकारी तक पहुंचने के बाद हड़कंप मच गया। शुक्रवार शाम को यात्रियों को किसी तरह हल्द्वानी से वापस गरुड़ लाया गया और फिर वहां से देहरादून भेजा गया। तहसीलदार निशा रानी ने शनिवार को स्वयं मेलाडुंगरी हेलीपैड पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और कंपनी के अधिकारियों के बयान दर्ज किए।
कंपनी ने मानी तकनीकी गलती, डीएम करेंगी कार्रवाई
जांच के दौरान हेरिटेज एविएशन ने स्वीकार किया कि यह एक तकनीकी खामी थी। हालांकि, तहसीलदार ने अपनी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया है कि यात्रियों की ओर से भी जागरूकता की कमी रही। यदि यात्रियों ने टिकट और बोर्डिंग पास पर लिखे गंतव्य को देखा होता, तो यह स्थिति पैदा नहीं होती। फिलहाल जिलाधिकारी स्तर से इस मामले में कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी ‘हवाई भूल’ की पुनरावृत्ति न हो।
हवाई सुरक्षा मानकों पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना ने उत्तराखंड में संचालित हो रही निजी हेलीकॉप्टर सेवाओं के सुरक्षा और प्रबंधन मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिना डेस्टिनेशन चेक किए यात्रियों को गलत उड़ान में बैठा देना एक बड़ी सुरक्षा चूक मानी जा रही है। राजस्व विभाग की प्रारंभिक जांच के बाद अब नागरिक उड्डयन विभाग भी इस मामले में हस्तक्षेप कर सकता है। यात्रियों ने भी स्वीकार किया कि उनसे टिकट जांचने में मानवीय भूल हुई, लेकिन मुख्य जिम्मेदारी सेवा प्रदाता कंपनी की तय की जा रही है।


