गोरखपुर के अस्पताल की शर्मनाक लापरवाही: नाले में कुत्ते नोच रहे थे इंसान का कटा पैर, CMO ने थमाया नोटिस

Uttar Pradesh News: गोरखपुर के पुर्दिलपुर इलाके में मानवता को शर्मसार करने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है। यहां के एक नाले के पास आवारा कुत्तों का झुंड एक कटे हुए इंसानी पैर को नोचते हुए देखा गया। इस हृदयविदारक घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे शहर में हड़कंप मच गया है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि यह अंग अग्रवाल आर्थोपेडिक अस्पताल की घोर लापरवाही के कारण खुले में फेंका गया था।

अस्पताल की लापरवाही पर स्वास्थ्य विभाग का कड़ा रुख

पुलिस की प्राथमिक जांच में खुलासा हुआ कि बिहार के एक मरीज का पैर दुर्घटना के बाद इसी अस्पताल में काटा गया था। नियमानुसार बायोमेडिकल वेस्ट का निस्तारण अस्पताल प्रबंधन को ही करना चाहिए था, लेकिन डॉक्टरों ने इस संवेदनशील जिम्मेदारी को एक सफाईकर्मी के भरोसे छोड़ दिया। मंगलवार को पुलिस ने इस अमानवीय कृत्य पर अस्पताल के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को पत्र लिखा। इसके बाद विभाग ने तत्काल प्रभाव से अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।

सीएमओ ने मांगा जवाब और दी कड़ी कार्रवाई की चेतावनी

पुलिस की रिपोर्ट के आलोक में सीएमओ डॉ. राजेश झा ने बुधवार को अग्रवाल आर्थोपेडिक अस्पताल को औपचारिक नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। डॉ. झा ने स्पष्ट किया कि अस्पताल से स्पष्टीकरण मिलने के बाद यदि दोष सिद्ध होता है, तो पंजीकरण रद्द करने जैसी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग इस मामले को बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स के उल्लंघन के रूप में देख रहा है। सरकारी तंत्र अब अस्पताल के पिछले रिकॉर्ड की भी बारीकी से जांच कर रहा है।

निदेशक ने सफाईकर्मी और परिजनों पर मढ़ा दोष

अस्पताल के निदेशक डॉ. आर.ए. अग्रवाल ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सर्जरी के बाद कटा हुआ पैर मरीज के परिजनों को सौंप दिया गया था। उन्होंने दावा किया कि परिजनों ने खुद अस्पताल के सफाईकर्मी को कुछ पैसे देकर इसे ठिकाने लगाने को कहा था। सफाईकर्मी ने इसे सही तरीके से नष्ट करने के बजाय पास के नाले में फेंक दिया। हालांकि, कानूनन अस्पताल अपनी इस जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकता क्योंकि बायोमेडिकल वेस्ट का अंतिम निस्तारण संस्था की ही जिम्मेदारी होती है।

शहर की छवि और बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन पर सवाल

इस घटना ने इंटरनेट मीडिया पर शहर की छवि को काफी नुकसान पहुंचाया है और स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है। लोग अब सवाल उठा रहे हैं कि क्या निजी अस्पताल केवल मुनाफे के लिए सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बायोमेडिकल वेस्ट को खुले में फेंकना न केवल अमानवीय है बल्कि इससे संक्रमण फैलने का भी भारी खतरा बना रहता है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में क्या मिसाल कायम करने वाली कार्रवाई करता है।

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