Delhi News: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक ऐसी गिरफ्तारी की है जिसने कानून व्यवस्था और अपराधियों के दुस्साहस की पोल खोल दी है। 13 साल के स्कूली छात्र के अपहरण और हत्या के दोषी सलीम खान पिछले 26 वर्षों से ‘भगोड़े’ थे। हैरानी की बात यह है कि वह छिपकर रहने के बजाय सार्वजनिक जीवन जी रहे थे। वह ‘सलीम वास्तिक’ के नाम से टीवी बहसों, पॉडकास्ट और सोशल मीडिया पर सक्रिय थे। पुलिस ने आखिरकार उन्हें गाजियाबाद के लोनी इलाके से दबोच लिया है।
मार्शल आर्ट ट्रेनर से हत्यारा बनने का सफर
सलीम खान दिल्ली के दरियागंज स्थित रामजस स्कूल में मार्शल आर्ट ट्रेनर थे। उन पर जनवरी 1995 में गोकुलपुरी थाने में इसी स्कूल के एक छात्र के अपहरण और हत्या का मामला दर्ज हुआ था। अदालत ने साल 1997 में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। हालांकि, नवंबर 2000 में दिल्ली हाई कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर निकले और तभी से फरार चल रहे थे। साल 2011 में भी उनकी सजा बरकरार रखी गई थी, लेकिन वह कभी गिरफ्त में नहीं आए।
कैसे खुली ‘सलीम वास्तिक’ की पहचान की पोल?
दिल्ली पुलिस की ‘एंटी रॉबरी एंड स्नेचिंग सेल’ ने इस पुराने मामले की फाइल मार्च 2024 में दोबारा खोली। जब टीम उनके पैतृक गांव शामली पहुंची, तो परिजनों ने उनके मरने का दावा किया। हालांकि, पुलिस को उनका कोई मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं मिला। ‘ह्यूमन इंटेलिजेंस’ के जरिए पुलिस को लोनी में रहने वाले ‘सलीम वास्तिक’ के बारे में जानकारी मिली। पुलिस ने 1995 में लिए गए फिंगरप्रिंट्स का मिलान सलीम वास्तिक से किया, जो पूरी तरह मैच हो गए।
नाम बदला पर परिवार की पहचान नहीं छुपाई
सलीम खान ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अपना सरनेम ‘खान’ हटाकर ‘वास्तिक’ कर लिया था। लेकिन उन्होंने अपने दस्तावेजों में पिता का नाम ‘नूर हसन’ और पत्नी का नाम ‘अफसाना’ ही रखा था। पुलिस को अदालत की पुरानी फाइलों से पता चला कि सलीम खान के पिता और पत्नी के नाम भी यही थे। इसके अलावा, शामली के एक जूडो संस्थान से मिला उनका पुराना पहचान पत्र वर्तमान चेहरे से मेल खा रहा था। इन ठोस सबूतों ने उन्हें कानून के कटघरे में खड़ा कर दिया।
टीवी और यूट्यूब पर बने रहे ‘एक्स-मुस्लिम’ चेहरा
फरारी के दौरान सलीम खान ने इस्लाम छोड़कर ‘एक्स-मुस्लिम’ की पहचान अपना ली थी। वह सोशल मीडिया और टीवी चैनलों पर इस्लाम के खिलाफ विवादित टिप्पणियां करने लगे। वह हिंदुत्ववादी संगठनों के करीब आ गए और खुद का यूट्यूब चैनल भी चलाने लगे। फरवरी 2026 में उन पर लोनी में हमला भी हुआ था। इस हमले के बाद वह और अधिक चर्चा में आ गए और यूपी पुलिस ने उन्हें निजी सुरक्षा कर्मी तक मुहैया करा दिए थे।
साक्षात्कारों में छिपाया जीवन का सबसे बड़ा राज
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सलीम खान ने पिछले कुछ वर्षों में दर्जनों साक्षात्कार दिए। वह अक्सर बताते थे कि इस्लाम छोड़ने से पहले वह मौलवी थे। हालांकि, उनके सभी वीडियो और साक्षात्कारों में साल 1995 से 2000 के बीच की अवधि का कोई जिक्र नहीं था। वह अपने जीवन के हर हिस्से पर खुलकर बोलते थे, लेकिन जेल जाने और हत्या के मामले पर चुप्पी साधे रहते थे। इसी संदेह ने पुलिस को उन तक पहुंचने का अहम सुराग दिया।
पीड़ित परिवार की आंखों में अब भी है गम और खौफ
सलीम की गिरफ्तारी के बाद 31 साल पहले जान गंवाने वाले छात्र के पिता सीताराम की आंखें भर आईं। वह आज भी उस मंजर को नहीं भूले हैं जब उनके 13 साल के बेटे की जान ली गई थी। सीताराम ने बताया कि उन्हें यह भी नहीं पता था कि सलीम जेल से फरार हो गया था। अब सलीम के रसूख और सुरक्षा को देखकर वह डरे हुए हैं। उन्हें डर है कि प्रभावशाली लोगों का समर्थन मिलने के कारण उन्हें फिर से कोई नुकसान न उठाना पड़े।


