Himachal News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में खराब हवाई सेवाओं पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने शिमला हवाई अड्डे से उड़ानें बंद होने पर केंद्र सरकार को सख्त फटकार लगाई है। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने इस स्थिति को सौतेला व्यवहार करार दिया है। कोर्ट ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव को तलब किया है। उन्हें अगली सुनवाई में वर्चुअल रूप से पेश होना होगा। अदालत ने पूछा है कि शिमला को हवाई उड़ान योजना का लाभ आखिर क्यों नहीं मिल रहा है।
राजधानी शिमला के साथ हो रहा है सौतेला व्यवहार
अदालत ने इस बात पर गहरी हैरानी जताई है। शिमला देश की इकलौती ऐसी राजधानी है, जिसे हवाई कनेक्टिविटी योजना का लाभ नहीं मिला है। अन्य सभी राज्यों की राजधानियां हवाई मार्ग से अच्छी तरह जुड़ी हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि हिमाचल एक पहाड़ी राज्य है। सड़क मार्ग से दिल्ली पहुंचने में आठ से दस घंटे लगते हैं। पर्यटन राज्य की अर्थव्यवस्था की मुख्य रीढ़ है। ऐसे में बेहतरीन हवाई सुविधा देना केंद्र सरकार का एक अहम नैतिक और संवैधानिक कर्तव्य है।
राज्य सरकार ने खर्च किए बत्तीस करोड़ रुपये
राज्य सरकार ने सीमित बजट के बावजूद बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने पांच अप्रैल को एलायंस एयर के साथ एक अहम समझौता किया है। इसके तहत बत्तीस करोड़ चौंसठ लाख रुपये की भारी भरकम फंडिंग दी गई है। इसका मुख्य मकसद राज्य में रुकी हुई विमान सेवाओं को तुरंत प्रभाव से शुरू करना है। विमानों की कमी का बहाना बनाकर उड़ानें रोकी गई हैं। राज्य ने कोर्ट को बताया कि केंद्रीय बजट में भी शिमला रूट की लगातार अनदेखी हुई है।
छह मई को होगी मामले की अगली अहम सुनवाई
एलायंस एयर ने मई महीने से उड़ानें दोबारा शुरू करने का भरोसा दिया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई छह मई को तय की है। यह जनहित याचिका शुरुआत में कांगड़ा हवाई अड्डे पर पक्षियों के खतरे को लेकर दायर हुई थी। हाईकोर्ट ने जनहित को ध्यान में रखते हुए इसका दायरा काफी बढ़ा दिया है। अब पूरे राज्य की हवाई कनेक्टिविटी को इस याचिका में शामिल कर लिया गया है।


