आपदा में भी कंपनियों पर मेहरबान सरकार? हाईकोर्ट की इस फटकार से कांपे अधिकारी, जानिए पूरा मामला

Himachal News: हिमाचल हाईकोर्ट ने आपदा राहत में लापरवाही पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कंपनियों के मुनाफे का दो फीसदी हिस्सा सीएसआर में खर्च न करवाने पर नाराजगी जताई। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया की पीठ ने इसे गंभीर माना। कोर्ट ने कहा कि राज्य ने हाल में दो बड़ी आपदाएं झेली हैं। इसके बावजूद शीर्ष स्तर पर सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए। लगता है सरकार ने पुरानी त्रासदियों से कोई सबक नहीं सीखा।

अधिकारियों के रवैये पर कोर्ट ने जताई हैरानी

सुनवाई में उद्योग विभाग के विशेष सचिव ने अदालत में हलफनामा पेश किया। हाईकोर्ट ने इस हलफनामे को काफी दिलचस्प बताया। इसमें तर्क दिया गया कि कंपनी अधिनियम के तहत जुर्माना लगाने की शक्ति केंद्र सरकार के पास है। यह प्रक्रिया कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के अधीन आती है। राज्य विभाग ने इस मुद्दे को अठाइस फरवरी को केंद्र के समक्ष उठाया है। अदालत ने महसूस किया कि अधिकारी अभी भी डेटा देने और पत्राचार में उलझे हैं।

मुख्य सचिव को विस्तृत हलफनामा दायर करने के सख्त आदेश

हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य सचिव को विस्तृत हलफनामा दायर करने के स्पष्ट आदेश दिए हैं। कोर्ट ने पूछा है कि आपदा के बाद पुनर्वास कार्यों में सीएसआर फंड की कितनी भागीदारी रही है। सरकार द्वारा जारी किए गए परिपत्रों की पूरी जानकारी मांगी गई है। अदालत ने यह भी सवाल किया कि क्या राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने नुकसान और बुनियादी ढांचे का जिलावार मूल्यांकन किया है। सरकार को इन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जल्द जवाब देना होगा।

बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और फंड के इस्तेमाल का ब्यौरा तलब

हाईकोर्ट ने पेयजल योजनाओं और अस्पतालों जैसे जरूरी कार्यों का पूरा ब्यौरा अदालत के समक्ष पेश करने को कहा है। कोर्ट यह जानना चाहता है कि स्कूलों और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए सीएसआर फंडिंग का उपयोग कैसे किया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इन कार्यों की पहचान राज्य आपदा प्राधिकरण की देखरेख में होनी चाहिए थी। सरकार को साबित करना होगा कि उसने आपदा से निपटने के लिए कॉर्पोरेट फंड का सही इस्तेमाल किया है या नहीं।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
/ month
placeholder text

Hot this week

Topics

Related Articles

Popular Categories