केजरीवाल की ‘तानाशाही’ पर रेखा गुप्ता का तीखा हमला, बोलीं- दिल्ली के बाद अब पंजाब की बारी, 7 सांसदों के जाने से AAP में मचा घमासान

New Delhi: आम आदमी पार्टी को शुक्रवार को उस वक्त अभूतपूर्व झटका लगा जब कभी अरविंद केजरीवाल के बेहद करीबी रहे राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने अपने साथ दो-तिहाई सांसदों को लेकर बीजेपी ज्वाइन कर ली। इस सियासी भूचाल पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सीधा निशाना साधते हुए इसे केजरीवाल की तानाशाही पर करारा वार बताया और चेतावनी दी कि दिल्ली के बाद अब पंजाब की बारी है।

राघव चड्ढा के साथ 7 सांसदों ने थामा बीजेपी का दामन

24 अप्रैल की शाम राजनीति के गलियारों में उस समय हड़कंप मच गया जब राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक समेत सात राज्यसभा सदस्यों ने आम आदमी पार्टी से इस्तीफा दे दिया। इनमें हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल भी शामिल रहीं। दो-तिहाई से अधिक सांसदों के एक साथ जाने से राज्यसभा में पार्टी की ताकत लगभग खत्म हो गई।

रेखा गुप्ता ने बताया केजरीवाल की तानाशाही का नतीजा

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ‘आप’ ने क्रांति के नारे के साथ शुरुआत की थी लेकिन अब यह अविश्वास और अलगाव के कारण अपने अंत की ओर बढ़ रही है। उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि पार्टी में अब कोई आम आदमी नहीं बचा, सिर्फ भ्रष्ट लोग ही रह गए हैं और यह सब केजरीवाल की तानाशाही का नतीजा है।

दिल्ली के बाद पंजाब की सत्ता से बेदखल होगी AAP

सीएम रेखा गुप्ता ने बड़ा राजनीतिक ऐलान करते हुए दावा किया कि जिस तरह पिछले साल दिल्ली के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने आप को हराकर 27 साल बाद सत्ता में वापसी की, ठीक उसी तरह अगले साल पंजाब में भी आप की सरकार बेदखल हो जाएगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली के बाद अब पंजाब की बारी है और वहां की जनता भी बदलाव के लिए तैयार है।

दल-बदल कानून की आड़ में सुरक्षित रही सांसदी

सातों सांसदों ने संवैधानिक प्रावधानों का कुशलता से इस्तेमाल किया। दल-बदल विरोधी कानून के तहत अगर किसी दल के दो-तिहाई सांसद एक साथ पाला बदलते हैं तो उनकी सदस्यता नहीं जाती। राज्यसभा में आप के कुल 10 सांसदों में से सात के इस्तीफे से यह शर्त पूरी हो गई। इस कानूनी ढाल ने सभी बागी सदस्यों की संसदीय कुर्सी को सुरक्षित बना दिया।

पंजाब की अंदरूनी कलह ने ला दिया बड़ा तोड़

सूत्रों के मुताबिक यह बगावत अचानक नहीं बल्कि महीनों से पनप रहे असंतोष का परिणाम थी। राघव चड्ढा और संदीप पाठक ने 2024 में ही केजरीवाल से शिकायत की थी कि पंजाब सरकार का कामकाज ठीक नहीं है। लेकिन केजरीवाल ने भगवंत मान पर भरोसा जताया। इसके बाद चड्ढा से पंजाब का सरकारी आवास और दिल्ली स्थित दफ्तर तक छीन लिया गया जिससे नाराजगी चरम पर पहुंच गई।

केजरीवाल के सामने साख बचाने की चुनौती

राज्यसभा से सात सांसदों के जाने के बाद आम आदमी पार्टी के पास अब केवल तीन सदस्य बचे हैं। संजय सिंह जैसे वरिष्ठ नेता इसे पंजाब के जनादेश के साथ गद्दारी बता रहे हैं। वहीं बीजेपी इसे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पंजाब में बड़ी सेंध के रूप में देख रही है। केजरीवाल के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती पार्टी की बिखरती छवि और पंजाब में सरकार को बचाने की है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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