Himachal News: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने शारीरिक शिक्षा प्रवक्ताओं की नियुक्ति मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने वरिष्ठता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को पूरी तरह खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने साफ किया है कि भर्ती नियमों के बाहर जाकर किसी व्यक्ति की नियुक्ति का आदेश बिल्कुल नहीं दिया जा सकता। इस फैसले से उन उम्मीदवारों को तगड़ा झटका लगा है, जो रोजगार कार्यालयों के जरिये बैचवाइज सीधी भर्ती की मांग कर रहे थे। अब उन्हें अदालत से राहत नहीं मिली है।
नियमों में नहीं है बैचवाइज भर्ती का कोई भी प्रावधान
न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की अदालत ने मामले के रिकॉर्ड का गहराई से अवलोकन किया। अदालत ने पाया कि पदोन्नति नियमों में बैचवाइज भर्ती का कोई भी प्रावधान मौजूद नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में मांग की थी कि उन्हें उचित तिथि से रोजगार कार्यालयों के माध्यम से नियुक्ति दी जाए। उन्होंने दावा किया था कि वे वरिष्ठ होने के बावजूद नौकरी से वंचित रह गए हैं।
नियमों की अनदेखी करके पद भरने का गंभीर आरोप
याचिकाकर्ताओं की शिकायत थी कि वे नियम के अनुसार पद के लिए पात्र थे। विभाग ने निर्धारित प्रक्रिया अपनाए बिना पदों को भर दिया। याचिकाकर्ताओं ने 2000 से 2013 के बीच डिप्लोमा प्राप्त किए थे। उस समय डीपीई के 237 पद खाली थे। आरोप था कि सरकार ने पीटीए नीति के तहत 328 पद भर दिए। इस पूरी प्रक्रिया में वरिष्ठ उम्मीदवारों को पूरी तरह से अनदेखा किया गया।
राज्य सरकार ने अदालत में पेश किए अहम आंकड़े
राज्य सरकार ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए बताया कि वर्तमान में शारीरिक शिक्षा प्रवक्ताओं की कुल कैडर संख्या 1527 है। नियमों के अनुसार इनमें से 25 फीसदी पद सीधी भर्ती से भरे जाने हैं। बाकी 75 फीसदी पद पदोन्नति के माध्यम से भरे जाने का नियम है। सरकार ने स्पष्ट किया कि सीधी भर्ती के 382 पदों के विरुद्ध 645 डीपीई नियुक्त किए हैं।
देरी और कानूनी प्रक्रिया के अभाव में याचिका खारिज
अदालत ने सभी तथ्यों को देखने के बाद देरी के कारण याचिकाओं को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने पुरानी नियुक्तियों को काफी देरी से साल 2014 में चुनौती दी थी। सबसे बड़ी बात यह रही कि जिन लोगों की नियुक्ति को अवैध बताया गया था, उन्हें पक्षकार नहीं बनाया गया। कानून के अनुसार किसी की अनुपस्थिति में आदेश पारित नहीं हो सकता।


