हिमाचल प्रदेश में 1 जून से शुरू होगी डिजिटल जनगणना, 19 हजार कर्मचारी घर-घर जाकर जुटाएंगे आंकड़े

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में जनगणना का महाअभियान आगामी 1 जून से औपचारिक रूप से शुरू होने जा रहा है। दो चरणों में प्रस्तावित इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया के लिए प्रशासन ने करीब 19 हजार कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है। राज्यपाल और मुख्यमंत्री से जानकारी एकत्र कर इस अभियान का प्रतीकात्मक आगाज किया जाएगा। इस बार नागरिक ऑनलाइन माध्यम से भी अपनी जानकारी पोर्टल पर साझा कर सकेंगे। सरकार ने जनगणना के आंकड़ों को पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल तकनीकों का व्यापक उपयोग सुनिश्चित किया है।

दो चरणों में पूरी होगी जनगणना की प्रक्रिया

जनगणना के पहले चरण में 1 जून से 15 जुलाई तक आवासीय भवनों और मकानों की सूची तैयार होगी। इसमें मकान की संरचना और उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं का विवरण दर्ज किया जाएगा। इसके बाद सितंबर से फरवरी 2027 तक दूसरे चरण का काम शुरू होगा। दूसरे चरण में परिवार के सदस्यों की वास्तविक गिनती, उनकी शिक्षा, रोजगार और आयु का विवरण लिया जाएगा। केंद्र सरकार ने इस अभियान के लिए 33 महत्वपूर्ण सवालों की एक सूची पहले ही जारी कर दी है।

शिक्षा और अन्य विभागों के कर्मचारियों को मिली जिम्मेदारी

इस महाअभियान को सफल बनाने के लिए शिक्षा विभाग से सबसे अधिक शिक्षकों और कर्मचारियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा स्वास्थ्य, लोक निर्माण और जल शक्ति विभाग के कर्मी भी इस कार्य में सहयोग करेंगे। जिला स्तर पर 1 जून से 15 जून तक सभी गणनाकारों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। उपायुक्तों को अपने स्तर पर स्टाफ का चयन करने का अधिकार दिया गया है। आंकड़ों की सटीकता के लिए कर्मचारियों को टैबलेट और मोबाइल एप का उपयोग सिखाया जाएगा।

डिजिटल सर्वे और डाटा सुरक्षा पर विशेष ध्यान

यह पहली बार है जब हिमाचल में घर-घर जाकर पूरी तरह डिजिटल सर्वे किया जाएगा। एन्यूमरेटर मोबाइल एप के जरिए लोकेशन और सुविधाओं का सटीक रिकॉर्ड बनाएंगे। डाटा लीक को रोकने के लिए एप में विशेष तकनीकी सुरक्षा फीचर जोड़े गए हैं। लोग वेब पोर्टल पर खुद भी अपना विवरण भर सकेंगे, जिससे कर्मियों का बोझ कम होगा। जिन क्षेत्रों में इंटरनेट की सुविधा नहीं है, वहां कर्मचारी भौतिक रूप से जाकर सारा डाटा ऑफलाइन मोड में सुरक्षित दर्ज करेंगे।

भविष्य की नीतियों के लिए निर्णायक होंगे आंकड़े

जनगणना से प्राप्त जानकारी प्रदेश की विकास योजनाओं और संसाधनों के वितरण के लिए आधार बनेगी। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे क्षेत्रों में नीतियां बनाने के लिए ये आंकड़े सबसे अधिक विश्वसनीय माने जाते हैं। सरकार का लक्ष्य 1 मार्च 2027 तक जनगणना के प्रारंभिक आंकड़े सार्वजनिक करना है। हालांकि, जाति आधारित गणना पर अभी अंतिम फैसला केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद ही लिया जाएगा। यह अभियान हिमाचल के भविष्य के आधारभूत ढांचे के विस्तार में मील का पत्थर साबित होगा।

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