Delhi News: ठग सुकेश चंद्रशेखर के सिंडिकेट के खिलाफ भारतीय जांच एजेंसियों को एक और बड़ी सफलता मिली है। सीबीआई ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के सहयोग से भगोड़े मोहम्मद नवास कक्कट इस्माइल को भारत प्रत्यर्पित कराया है। आरोपी को 4 मई 2026 को कड़ी सुरक्षा के बीच दिल्ली लाया गया। सोमवार को उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से दिल्ली पुलिस को उसकी 10 दिनों की कस्टडी मिल गई। यह गिरफ्तारी करोड़ों रुपये की उगाही से जुड़े हाई-प्रोफाइल मामले में हुई है।
रेड कॉर्नर नोटिस और इंटरपोल की मदद से गिरफ्तारी
मोहम्मद नवास के खिलाफ दिल्ली पुलिस के अनुरोध पर सीबीआई ने पहले ही इंटरपोल के जरिए रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाया था। इसके बाद दुबई और यूएई की सुरक्षा एजेंसियों ने उसकी लोकेशन ट्रैक कर उसे हिरासत में लिया। कानूनी प्रक्रियाओं और निरंतर आपसी समन्वय के बाद उसे भारत को सौंप दिया गया। आईजीआई एयरपोर्ट पर उतरते ही दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। नवास को कोर्ट ने पहले ही घोषित अपराधी करार दिया था।
217 करोड़ की उगाही और मकोका का शिकंजा
जांच एजेंसियों के अनुसार, नवास रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर शिविंदर सिंह की पत्नी अदिति सिंह से 217 करोड़ रुपये की ठगी में शामिल है। सुकेश चंद्रशेखर ने जेल से शिविंदर सिंह को रिहा कराने का झांसा देकर यह भारी रकम वसूली थी। दिल्ली पुलिस ने इस सिंडिकेट के खिलाफ ‘मकोका’ (MCOCA), जबरन वसूली, धोखाधड़ी और आपराधिक गबन जैसे संगीन आरोप लगाए हैं। इस पूरे केस में अब तक सुकेश और उसकी पत्नी समेत कुल 22 आरोपियों को पकड़ा जा चुका है।
दुबई से सुकेश का फाइनेंशियल नेटवर्क संभालता था नवास
एडिशनल सीपी अमित वर्मा ने नवास की भूमिका पर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि नवास सुकेश चंद्रशेखर का सबसे भरोसेमंद वित्तीय सलाहकार था। वह दुबई में बैठकर सुकेश के लिए हवाला नेटवर्क का संचालन करता था। अपराध से मिली काली कमाई को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करना और पैसों की लेयरिंग करना उसकी मुख्य जिम्मेदारी थी। वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैसों के मूवमेंट को मैनेज करता था, जिससे ठगी की रकम को ट्रैक करना मुश्किल हो जाए।
‘भारतपोल’ के जरिए भगोड़े अपराधियों पर कड़ा एक्शन
सीबीआई भारत में इंटरपोल के नेशनल सेंट्रल ब्यूरो के रूप में ‘भारतपोल’ प्लेटफॉर्म का प्रभावी उपयोग कर रही है। इसके जरिए देश की विभिन्न जांच एजेंसियां आपसी तालमेल से फरार अपराधियों को वापस लाने की कोशिश में जुटी हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारतपोल की मदद से 150 से अधिक वांछित अपराधियों को कानून के घेरे में लाया गया है। नवास का प्रत्यर्पण इसी रणनीति का एक हिस्सा है, जिससे संगठित अपराध करने वाले सिंडिकेट की कमर पूरी तरह टूट गई है।
पत्नी लीना पॉलोज को मिली जमानत पर नहीं होगी रिहाई
एक अन्य घटनाक्रम में दिल्ली हाई कोर्ट ने सुकेश की पत्नी लीना पॉलोज को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राहत दी है। कोर्ट ने ईडी द्वारा दर्ज 200 करोड़ की रंगदारी के मामले में उसे जमानत दे दी। हालांकि, लीना अभी जेल में ही रहेगी क्योंकि मकोका मामले में उसकी जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। दिल्ली पुलिस की ईओडब्ल्यू मामले की बारीकी से जांच कर रही है ताकि सभी आरोपियों को कड़ी सजा दिलाई जा सके और नेटवर्क को ध्वस्त किया जाए।

