IIT Madras Summit: क्या 1 लाख करोड़ के बजट से बदलेगी भारत की किस्मत? लैब से बाजार तक का नया फॉर्मूला तैयार

New Delhi News: नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित आईआईटी मद्रास के पहले प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन ने देश की तकनीकी दिशा बदल दी है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए स्पष्ट किया कि अब केवल शोध पत्रों और पेटेंट से काम नहीं चलेगा। सरकार का मुख्य लक्ष्य प्रयोगशालाओं में विकसित होने वाले नवाचारों को सीधे आम जनता के जीवन तक पहुंचाना है। इस शिखर सम्मेलन में शिक्षा, उद्योग और सरकार ने मिलकर 2047 के विकसित भारत का रोडमैप तैयार किया है।

रिसर्च मेट्रिक्स से आगे बढ़कर वास्तविक प्रभाव पर जोर

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संबोधन में शोध के पारंपरिक तरीकों को चुनौती देते हुए इसे व्यावहारिक बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि असली सफलता तब है जब लैब के विचार अस्पतालों, खेतों और कारखानों में क्रांति लाएं। अब समय आ गया है कि भारत केवल डेटा और आंकड़ों के बजाय समाज पर पड़ने वाले वास्तविक प्रभाव को अपनी प्राथमिकता बनाए। शोधकर्ताओं को ऐसी समस्याओं का समाधान खोजना होगा जो सीधे तौर पर भारतीय नागरिकों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने में मदद कर सकें।

सरकार और उद्योग की 50-50 साझेदारी का नया मॉडल

केंद्र सरकार ने अनुसंधान और विकास के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का विशाल कोष आवंटित किया है। हालांकि, शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि केवल सरकारी निवेश से भारत वैश्विक नवाचार शक्ति नहीं बन सकता। उन्होंने उद्योग जगत और सार्वजनिक क्षेत्र के बीच 50-50 प्रतिशत की सक्रिय साझेदारी का आह्वान किया है। यह सहयोग सुनिश्चित करेगा कि उच्च गुणवत्ता वाला अनुसंधान तेजी से बाजार की जरूरतों को पूरा करे। जब उद्योग और शिक्षण संस्थान मिलकर काम करेंगे, तभी शोध को उचित गति और व्यावसायिक आधार मिलेगा।

डीप-टेक और संप्रभु एआई में भारत की बढ़ती धमक

कौशल विकास राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने सम्मेलन में भारत के डीप-टेक भविष्य पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि रोबोटिक सर्जरी, कार्डियक रिसर्च और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में भारतीय संस्थान अब वैश्विक स्तर पर नेतृत्व कर रहे हैं। भारत अब केवल विदेशी तकनीकों का अनुसरण नहीं कर रहा, बल्कि अपनी ‘संप्रभु एआई’ (Sovereign AI) और उन्नत प्रणालियों के साथ नई दिशा तय कर रहा है। यह तकनीकी आत्मनिर्भरता भारत को आने वाले दशकों में एक मजबूत और सुरक्षित डिजिटल महाशक्ति के रूप में स्थापित करेगी।

प्रमुख कंपनियों के साथ आईआईटी मद्रास के रणनीतिक समझौते

शिखर सम्मेलन के दौरान आईआईटी मद्रास ने एनटीपीसी लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम और एचएसबीसी जैसी बड़ी कंपनियों के साथ महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इन साझेदारियों का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी और टिकाऊ ऊर्जा समाधानों के लिए अत्याधुनिक अनुसंधान केंद्र स्थापित करना है। ये केंद्र न केवल नई तकनीकों का विकास करेंगे, बल्कि युवाओं के लिए कौशल विकास के नए अवसर भी पैदा करेंगे। ऐसी रणनीतिक संधियां अकादमिक जगत और कॉर्पोरेट सेक्टर के बीच की दूरी को कम करने में मील का पत्थर साबित होंगी।

भविष्य की प्रदर्शनी और सामाजिक चुनौतियों का समाधान

कार्यक्रम के दौरान आईआईटी मद्रास के 15 उत्कृष्टता केंद्रों ने अपनी नवीनतम तकनीकों का प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शनी में ऊर्जा, उन्नत सामग्री और सतत विकास से जुड़ी ऐसी मशीनें दिखाई गईं जो सीधे सामाजिक समस्याओं को हल करती हैं। यह आयोजन केवल एक औपचारिक बैठक नहीं थी, बल्कि एक ऐसा मंच था जहां भविष्य की चुनौतियों के समाधान पेश किए गए। 2047 तक भारत को तकनीकी मोर्चे पर दुनिया का अग्रणी देश बनाने के लिए यह त्रिकोणीय साझेदारी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित होने वाली है।

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