Himachal News: हिमाचल प्रदेश में करोड़ों रुपये के वाहन पंजीकरण फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। सोलन पुलिस ने इस महाघोटाले के मुख्य आरोपी गौरव भारद्वाज को शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया है। यह आरोपी पिछले तीन महीने से पुलिस को चकमा दे रहा था। दिल्ली क्राइम ब्रांच और बिलासपुर पुलिस भी उसकी तलाश कर रही थी। इस गिरफ्तारी से चोरी की लग्जरी गाड़ियों को वैध बनाने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट के कई अहम खुलासे होने की पूरी उम्मीद है।
फर्जी आईडी बनाकर किया करोड़ों का हेरफेर
पुलिस की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। आरएलए झंडूता में कार्यरत क्लर्क गौरव ने सोलन कार्यालय के सिस्टम में अनधिकृत प्रवेश किया था। उसने क्लर्क जितेंद्र ठाकुर की आधिकारिक आईडी के अलावा डॉ. पूनम और जितेंथा नाम से फर्जी यूजर आईडी बनाई थीं। इन्हीं जाली आईडी के जरिए उसने चोरी के वाहनों का वेरिफिकेशन और अप्रूवल किया। पुलिस के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े में आरोपी के बैंक खातों से करोड़ों रुपये का अवैध लेनदेन हुआ है।
पांच एजेंटों के जरिए बिछाया था पूरा जाल
आरोपी गौरव ने इस काले कारोबार को चलाने के लिए पांच एजेंटों की एक टीम बनाई थी। राजकुमार, विकास, जितेंद्र और अनिल जैसे एजेंट ग्राहकों को लाते थे और उनसे मोटी रकम वसूलते थे। ये लोग वाहनों का वजन बढ़ाने, बैंक का नाम हटाने और नंबर बदलने जैसे अवैध काम करते थे। बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के ही गाड़ियों का पंजीकरण और स्वामित्व बदल दिया जाता था। इस रैकेट ने दर्जनों गाड़ियों को फर्जी तरीके से बेचा है।
दिल्ली क्राइम ब्रांच ने खोला था सिंडिकेट का राज
इस मामले का खुलासा सबसे पहले दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने किया था। यह नेटवर्क हिमाचल, पंजाब और दिल्ली सहित कई राज्यों में सक्रिय था। नौ जनवरी को इस मामले में पहली प्राथमिकी दर्ज हुई थी। इसके बाद बीस जनवरी को आरएलए बिलासपुर के वरिष्ठ सहायक सुभाष को पकड़ा गया था। तभी से मुख्य आरोपी गौरव फरार चल रहा था। पिछले सप्ताह दिल्ली उच्च न्यायालय ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया था।
पूछताछ में कई बड़े सफेदपोश बेनकाब होने की संभावना
पुलिस ने तीन अप्रैल को एक क्लर्क और पांच एजेंटों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। ये आरोपी बिलासपुर, मंडी, ऊना और कांगड़ा के रहने वाले हैं। सोलन के पुलिस अधीक्षक टीएसडी वर्मा ने मुख्य आरोपी गौरव की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि मुख्य आरोपी से पूछताछ में पता चलेगा कि यह फर्जीवाड़ा कहां-कहां हुआ है। इस प्रकरण में शामिल अन्य व्यक्तियों और संभावित बड़े नेटवर्क की पहचान तेजी से की जा रही है।


