हिमाचल हाईकोर्ट का अहम फैसला: क्लास थ्री कर्मचारियों को भी मिलेगा दैनिक वेतन भोगी सेवा का पेंशन लाभ

Himachal News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के हित में एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया है जिसमें क्लास थ्री कर्मचारी को पेंशन लाभ देने का विरोध किया गया था। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि दैनिक वेतन भोगी सेवा का लाभ केवल चतुर्थ श्रेणी तक सीमित नहीं है। अब क्लास थ्री कर्मचारियों की भी दैनिक वेतन भोगी सेवा को पेंशन पात्रता के लिए जोड़ा जाएगा।

राज्य सरकार की अपील को बताया भ्रामक

सरकार ने दलील दी थी कि सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले केवल क्लास फोर कर्मचारियों पर लागू होते हैं। लेकिन हाईकोर्ट ने इस तर्क को पूरी तरह भ्रामक और निराधार बताया। अदालत ने कहा कि अगर किसी कर्मचारी की नियमित सेवा पेंशन अवधि (10 वर्ष) से कम है, तो पिछले दैनिक वेतन भोगी कार्यकाल को जोड़ना अनिवार्य है। कोर्ट ने राजू राम मामले का उदाहरण देते हुए एकल पीठ के फैसले को पूरी तरह सही ठहराया है।

कर्मचारी राजू राम का पूरा मामला

राजू राम की नियुक्ति साल 1992 में दैनिक वेतन भोगी के रूप में हुई थी। इसके बाद 1 जनवरी 2002 को उनकी सेवाओं को नियमित कर दिया गया। वह 28 फरवरी 2011 को अपने पद से सेवानिवृत्त हो गए। उनकी नियमित सेवा केवल 9 साल और 2 महीने ही रही। यह 10 साल की न्यूनतम पेंशन अवधि से कम थी। इसलिए अदालत ने आदेश दिया कि उनके 1992 से 2002 तक के दैनिक सेवा काल का लाभ उन्हें जरूर दिया जाए।

रोके गए सेवा लाभ तुरंत बहाल करने के निर्देश

हाईकोर्ट ने एक और मामले में कड़ा निर्देश देते हुए शिक्षकों और कर्मचारियों के रोके गए सेवा लाभों को बहाल करने का आदेश दिया है। अदालत ने शिक्षा विभाग को 30 जून 2026 तक सभी देय लाभ प्रदान करने के सख्त निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सरकार ने 2024 के नए अधिनियम का हवाला देकर उनके सेवा लाभ रोक दिए थे। यह लाभ उन्हें वर्षों पहले अदालती आदेशों के आधार पर ही मिले थे।

पुराने मामलों पर लागू नहीं होगा नया कानून

सरकार ने अदालत में अपनी गलती सुधारते हुए एक अहम बयान दिया है। सरकार ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि पुराने डीम्ड रेगुलाइजेशन के मामलों पर नया कानून प्रभावी नहीं होगा। हिमाचल प्रदेश भर्ती और सेवा शर्तें अधिनियम, 2024 उन मामलों पर लागू नहीं हो सकता जो पहले ही कोर्ट द्वारा तय किए जा चुके हैं। सरकार ने माना कि पुराने स्वीकृत निर्णयों को इस नए कानून की आड़ में अब दोबारा नहीं खोला जा सकता।

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