Himachal News: हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत का ऐलान किया है। वित्त विभाग ने एक नई अधिसूचना जारी कर हजारों परिवारों को आर्थिक संबल प्रदान किया है। इसके तहत वर्ष 2016 से 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए या दिवंगत हुए कर्मचारियों के बकाया भुगतान का रास्ता साफ हो गया है। सरकार ने ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण की लंबित राशि को तुरंत जारी करने के आदेश दिए हैं। इस फैसले से कर्मचारियों में खुशी की लहर है।
ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण का होगा पूरा भुगतान
वित्त विभाग के आदेशानुसार 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच रिटायर हुए कर्मचारियों को अब अपनी बकाया राशि के लिए और इंतजार नहीं करना होगा। सरकार इन कर्मचारियों को ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण की बची हुई 30 प्रतिशत राशि का एकमुश्त भुगतान करेगी। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि इस ताजा भुगतान के बाद संबंधित कर्मचारियों की देनदारी पूरी तरह खत्म मानी जाएगी। यह आदेश उन परिवारों के लिए भी लागू होगा जिनके मुखिया का सेवाकाल के दौरान निधन हो गया था।
राज्यपाल की मंजूरी के बाद अधिसूचना हुई प्रभावी
यह महत्वपूर्ण निर्णय पूर्व में जारी कार्यालय ज्ञापनों की निरंतरता में लिया गया है। प्रदेश के राज्यपाल ने इस फाइल को अपनी औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसके बाद वित्त विभाग ने प्रदेश के सभी संबंधित विभागों को इस पर अमल करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। सरकार ने 17 सितंबर 2022 और 27 जनवरी 2026 के पुराने आदेशों में आंशिक संशोधन कर इस प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया है। अब वित्तीय लाभ सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचेंगे।
पेंशन और महंगाई राहत की किस्तों का होगा समायोजन
सरकार ने भुगतान प्रक्रिया के साथ-साथ समायोजन के नियमों को भी साफ कर दिया है। अधिसूचना के अनुसार पूर्व में दी गई अंतरिम राहत और महंगाई भत्ते की किस्तों को भविष्य के बकाया से एडजस्ट किया जाएगा। यह समायोजन 2016 से 2021 के बीच जारी विभिन्न सरकारी दिशानिर्देशों के तहत किया जाएगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी कर्मचारी को मिलने वाला लाभ नियमों के दायरे में रहे। इससे भविष्य में किसी भी प्रकार की कानूनी अड़चन नहीं आएगी।
बैंकों और ट्रेजरी को मिले सख्त निर्देश
वित्त विभाग ने भुगतान के दौरान पारदर्शिता बनाए रखने की जिम्मेदारी वितरण एजेंसियों पर डाली है। पेंशन बांटने वाले सभी बैंकों और ट्रेजरी कार्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि वे डेटा का सही मिलान करें। विभाग ने साफ किया है कि गणना के दौरान किसी भी प्रकार की त्रुटि या दोहराव नहीं होना चाहिए। कर्मचारियों को पहले मिल चुकी राहत राशि का सटीक हिसाब रखकर ही अंतिम भुगतान किया जाएगा। सरकार के इस कदम से राज्य की वित्तीय व्यवस्था में भी स्पष्टता बनी रहेगी।
