Delhi News: राजधानी दिल्ली के संत नगर स्थित आर्यसमाज मंदिर में रविवार को ‘विश्व यज्ञ दिवस’ के अवसर पर एक भव्य वैदिक यज्ञ का आयोजन किया गया। इस विशेष समारोह में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आए गणमान्य नागरिकों और धर्मावलंबियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। उपस्थित जनसमूह ने वैश्विक शांति, मानवीय कल्याण और सनातन वैदिक संस्कृति के संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आधुनिक समय में वैदिक परंपराओं की प्रासंगिकता को रेखांकित करना और नई पीढ़ी को इससे जोड़ना था।
यज्ञ को बताया श्रेष्ठ कर्म और प्रदूषण मुक्ति का मार्ग
इस महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने भी शिरकत की। आईएएनएस से विशेष बातचीत के दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय यज्ञ दिवस की शुभकामनाएं देते हुए यज्ञ को वेदों के अनुसार ‘श्रेष्ठतम कर्म’ बताया। बंसल ने जोर देकर कहा कि यज्ञ न केवल आध्यात्मिक और सांस्कृतिक सुख प्रदान करता है, बल्कि यह पर्यावरण को शुद्ध करने और प्रदूषण कम करने में भी वैज्ञानिक रूप से सहायक सिद्ध होता है।
वैश्विक संघर्ष और आर्थिक संकट के बीच शांति का संदेश
विनोद बंसल ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज दुनिया युद्ध की मानसिकता में डूबी हुई है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर आर्थिक संकट भी उत्पन्न हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि वैदिक यज्ञ की भावना इन सभी संकटों का वास्तविक समाधान है। यज्ञ हमें एक-दूसरे से जोड़ता है और हमारे भीतर समर्पण की भावना जगाता है। इससे व्यक्ति का अहंकार और द्वेष समाप्त होता है, जो राष्ट्र की उन्नति के लिए आवश्यक है।
मानसिक शुद्धि और सामाजिक समरसता के लिए यज्ञ अनिवार्य
वीएचपी प्रवक्ता ने दैनिक यज्ञ के लाभ गिनाते हुए कहा कि इससे मानसिक प्रदूषण का अंत होता है। उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति से आह्वान किया कि वे अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए इस परंपरा को अपनाएं। उनके अनुसार, यज्ञ केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं बल्कि लोकमंगल के लिए किया गया सामूहिक त्याग है। आज जब विश्व आतंकवाद और नैतिक पतन जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है, तब यज्ञ की सकारात्मक ऊर्जा समाज को नई दिशा दे सकती है।
घर-घर तक यज्ञ की ज्योति पहुंचाने का लिया गया सामूहिक संकल्प
कार्यक्रम के समापन पर मंदिर परिसर में उपस्थित सभी लोगों ने एक विशेष संकल्प पत्र दोहराया। भक्तों ने अपने व्यक्तिगत स्वार्थों और विकारों को त्यागकर निस्वार्थ भाव से मानवता की सेवा करने की शपथ ली। समाज के संरक्षण और संवर्धन हेतु संकल्पित कार्यकर्ताओं ने घोषणा की कि वे ‘यज्ञ की ज्योति’ को प्रत्येक घर तक पहुंचाने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान चलाएंगे। इस दौरान मंदिर प्रशासन और संबंधित विभागों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे, जिन्होंने इस पहल की सराहना की।


