अमेरिकी दूत सर्जियो गोर को नेपाल में लगा बड़ा झटका: प्रधानमंत्री बालेन शाह ने मिलने से किया इनकार, क्या बदल रहे हैं दक्षिण एशिया के समीकरण?

Nepal News: दक्षिण एशिया की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त कूटनीतिक हलचल देखी जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दक्षिण और मध्य एशिया के विशेष दूत सर्जियो गोर को एक के बाद एक कूटनीतिक झटकों का सामना करना पड़ रहा है। मालदीव के बाद अब नेपाल के नवनियुक्त प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भी उनसे मुलाकात करने से साफ इनकार कर दिया है। यह घटनाक्रम क्षेत्र के छोटे देशों की बढ़ती स्वतंत्र विदेश नीति और स्वायत्तता की ओर स्पष्ट संकेत दे रहा है।

बालेन शाह के इनकार के पीछे ‘घरेलू प्राथमिकता’ का तर्क

सर्जियो गोर एक उच्चस्तरीय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ तीन दिवसीय काठमांडू दौरे पर थे। अमेरिकी दूतावास ने प्रधानमंत्री बालेन शाह के साथ द्विपक्षीय बैठक का औपचारिक अनुरोध किया था। हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। आधिकारिक बयान के अनुसार, पीएम शाह वर्तमान में केवल घरेलू शासन और आंतरिक सुशासन से जुड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मुलाकातों से अधिक जरूरी देश की आंतरिक समस्याएं हैं।

नया कूटनीतिक प्रोटोकॉल और भू-राजनीतिक संतुलन

नेपाली थिंक टैंक का मानना है कि बालेन शाह एक नया और सख्त कूटनीतिक प्रोटोकॉल स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके तहत नेपाल के प्रधानमंत्री केवल समकक्ष राष्ट्राध्यक्षों या विदेश मंत्री स्तर के शीर्ष अधिकारियों से ही मुलाकात करेंगे। यह कदम पद की गरिमा और अंतरराष्ट्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए उठाया गया है। इसके अलावा, नेपाल खुद को अमेरिका, चीन और भारत की त्रिकोणीय प्रतिस्पर्धा से दूर रखना चाहता है ताकि किसी भी वैश्विक गुटबाजी का हिस्सा बनने से बच सके।

मालदीव में भी सर्जियो गोर को मिली थी ‘ना’

नेपाल से पहले मालदीव में भी अमेरिकी दूत सर्जियो गोर को इसी तरह की असहज स्थिति का सामना करना पड़ा था। राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने उनसे मिलने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। मुइज्जू ने स्पष्ट कर दिया था कि वे मध्य-पूर्व और ईरान के संघर्ष पर अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की चर्चा नहीं करना चाहते। मालदीव सरकार ने अपनी संप्रभुता का हवाला देते हुए साफ किया कि वे बाहरी सैन्य गतिविधियों के लिए अपने क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं होने देंगे।

झटके के बावजूद अमेरिकी दूत ने दौरे को बताया ‘सफल’

तमाम कूटनीतिक गतिरोधों के बीच सर्जियो गोर शनिवार रात नेपाल से नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए। उन्होंने अपनी यात्रा को ‘बेहद उत्पादक’ और सफल करार दिया है। गोर ने नेपाल की नई राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) सरकार के सुधार कार्यक्रमों की जमकर तारीफ की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि नेपाल की नई सरकार के पास बदलाव का एक बड़ा जनादेश है। उन्होंने विदेश मंत्री शिशिर खनाल और वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले के साथ व्यापारिक मुद्दों पर चर्चा की।

तकनीकी सहयोग और सांस्कृतिक विरासत पर जोर

अमेरिकी दूतावास के अनुसार, इस दौरे का एक बड़ा उद्देश्य नेपाल के टेक सेक्टर में निवेश बढ़ाना था। सर्जियो गोर ने एवरेस्ट बेस कैंप का दौरा कर अमेरिकी ड्रोन तकनीक का प्रदर्शन देखा। इस तकनीक की मदद से एवरेस्ट पर डिलीवरी का समय दिनों से घटकर मिनटों में रह जाएगा। इसके अलावा, अमेरिका से वापस लाई गई ‘अक्षोभ्य बुद्ध’ की प्राचीन मूर्ति को नेपाल सरकार को सौंपने के समारोह में भी वे शामिल हुए। गोर ने एमसीसी प्रोजेक्ट के तहत बिजली लाइनों के निर्माण में सरकारी सहयोग का स्वागत किया।

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