आगरा जलकल विभाग में 16 करोड़ का ‘महाघोटाला’! नगरायुक्त ने रोके भुगतान, अब नपेंगे कई बड़े अफसर

Uttar Pradesh News: ताजनगरी आगरा के जलकल विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ नगर निगम ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल ने विभाग के 16 करोड़ रुपये के भारी-भरकम भुगतान पर तत्काल रोक लगा दी है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि पहले सभी कार्यों की गहन तकनीकी जांच होगी, उसके बाद ही कोई पैसा जारी किया जाएगा। यदि जांच से पहले भुगतान हुआ, तो वित्त विभाग के अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मरम्मत के नाम पर चल रहा था फाइलों का खेल

भ्रष्टाचार का यह पूरा खेल पाइपलाइनों की मरम्मत और लीकेज के नाम पर खेला जा रहा था। सूत्रों के मुताबिक, विभाग के अधिकारी एक ही क्षेत्र में काम दिखाकर फर्जी तरीके से चार से पांच फाइलें तैयार कर रहे थे। एक साल पहले तक हर दिन दो दर्जन से अधिक लीकेज दिखाकर सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा था। वबाग कंपनी के कार्यों की निगरानी में भारी लापरवाही बरती गई, जिसके कारण अब पूरी प्रक्रिया संदेह के घेरे में है।

महाप्रबंधक पहले ही हो चुके हैं निलंबित

जलकल विभाग में करीब साढ़े चार करोड़ रुपये के गबन के मामले में बड़ी कार्रवाई पहले ही हो चुकी है। इसी साल 23 अप्रैल को विभाग के तत्कालीन महाप्रबंधक एके राजपूत को शासन द्वारा निलंबित किया जा चुका है। नगरायुक्त ने हाल ही में विभाग का औचक निरीक्षण किया था, जिसके बाद भ्रष्टाचार की परतें खुलना शुरू हुईं। अब स्थानीय निकाय के निदेशक खुद आगरा आकर इस पूरे मामले की विस्तृत जांच करेंगे।

अवैध नियुक्तियों और कर्मचारियों पर भी गिरेगी गाज

निदेशक की इस उच्चस्तरीय जांच में केवल वित्तीय अनियमितताएं ही नहीं, बल्कि आधा दर्जन कर्मचारियों की संदिग्ध नियुक्तियां भी शामिल हैं। कर्मचारी सुमित पचौरी की भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। वहीं जूनियर इंजीनियर राजीव कुमार के खिलाफ भी कई प्रकार की गड़बड़ियों की शिकायतें शासन तक पहुंची हैं। जांच टीम इन सभी बिंदुओं पर बारीकी से साक्ष्य जुटा रही है, जिससे विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

इन बड़ी कंपनियों और ठेकेदारों के फंसे पैसे

नगरायुक्त की सख्ती के कारण कई बड़ी कंपनियों के भुगतान अटक गए हैं। सत्तार कंस्ट्रक्शन और सीके कंस्ट्रक्शन कंपनी के करीब 10 करोड़ रुपये रोक दिए गए हैं। आर्यन एंटरप्राइजेज के 1.35 करोड़ और नेशनल इंडस्ट्रीज के 3.67 करोड़ रुपये के बिल भी जांच के दायरे में हैं। इसके अलावा एलटेक इंजीनियरिंग, शान-ए लखनऊ और सापरा एंड कंपनी के 80 लाख रुपये के भुगतान पर भी विभाग ने फिलहाल ब्रेक लगा दिया है।

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