कूड़े के ढेरों से मिलेगी मुक्ति? सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के नए नियम 2026 लागू, अब आपकी सोसायटी और ऑफिस की बढ़ी जिम्मेदारी

Delhi News: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत पूरे देश में कचरा प्रबंधन की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव किया गया है। अब एक दशक पुराने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (SWM) नियम 2016 की जगह नए ‘SWM नियम 2026’ को प्रभावी रूप से लागू कर दिया गया है। इन नए नियमों के तहत ‘बल्क वेस्ट जनरेटर्स’ की परिभाषा को व्यापक बनाया गया है, जिससे अब बड़े संस्थानों की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। सरकार का मुख्य उद्देश्य कचरे का स्थानीय स्तर पर ही सुरक्षित निपटान सुनिश्चित करना है।

कौन आएगा ‘बल्क वेस्ट जनरेटर’ के नए दायरे में?

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के नए नियमों के अनुसार अब तीन श्रेणियों के आधार पर संस्थानों की पहचान की जाएगी। अगर किसी सरकारी या निजी संस्थान का क्षेत्रफल 20,000 वर्गमीटर या उससे अधिक है, तो उसे इस श्रेणी में रखा जाएगा। इसके अलावा, यदि किसी संस्थान में प्रतिदिन 40,000 लीटर से अधिक पानी की खपत होती है या वहां से हर दिन 100 किलो से ज्यादा कचरा निकलता है, तो उन्हें खुद अपने कूड़े के प्रबंधन की व्यवस्था करनी होगी।

इन संस्थानों पर लागू होंगे कड़े नियम

नए नियमों का दायरा अब केवल उद्योगों तक सीमित नहीं है। इसमें सरकारी विभाग, स्थानीय निकाय, सार्वजनिक उपक्रम, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और शैक्षणिक संस्थान भी शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही बड़ी आवासीय सोसायटियां, होटल, मार्केट्स और बड़े आयोजनों के आयोजक भी अब कानूनन अपने कचरे को खुद ठिकाने लगाने के लिए बाध्य होंगे। एमसीडी का मानना है कि इस कदम से दिल्ली के लैंडफिल साइट्स पर कूड़े का बोझ काफी हद तक कम हो जाएगा।

क्या है EBWGR सर्टिफिकेट और इसकी अनिवार्यता?

यदि कोई संस्थान तकनीकी या अन्य कारणों से अपने कचरे का निपटान खुद करने में असमर्थ है, तो उन्हें एमसीडी से विशेष अनुमति लेनी होगी। इसके लिए ‘एक्सटेंड बल्क वेस्ट जनरेटर रेस्पांसिबिल्टी’ (EBWGR) का सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य कर दिया गया है। यह प्रमाण पत्र इस बात की गारंटी देगा कि संस्थान अपने कचरे की जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभा रहा है। पुराने नियमों में केवल 100 किलो कचरा पैदा करने वाले संस्थानों को ही इस श्रेणी में रखा गया था, लेकिन अब मानकों को और कड़ा किया गया है।

MCD ने जारी किए नोटिस, मेट्रो और रेलवे को भी निर्देश

दिल्ली नगर निगम (MCD) ने नए नियमों को जमीन पर उतारने के लिए कमर कस ली है। निगम कमिश्नर ने दिल्ली मेट्रो (DMRC), रेलवे, DSIIDC और उच्च शिक्षा विभाग समेत एक दर्जन से अधिक बड़े संस्थानों को पत्र लिखकर सख्त निर्देश दिए हैं। इन सभी संस्थानों को अब अपने यहां से निकलने वाले गीले और सूखे कूड़े को अनिवार्य रूप से अलग-अलग करना होगा। कचरा प्रबंधन में किसी भी प्रकार की कोताही बरतने पर अब भारी जुर्माने और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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