Delhi News: आईआरसीटीसी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की मुश्किलें फिलहाल टल गई हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बुधवार को इस हाई-प्रोफाइल केस में आरोप तय करने पर अपना फैसला स्थगित कर दिया। अब अदालत इस मामले में 22 मई को अगली सुनवाई करेगी और अपना अंतिम निर्णय सुनाएगी। इस देरी ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को तेज कर दिया है, क्योंकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने लालू परिवार के खिलाफ गंभीर सबूत पेश किए हैं।
पूरे लालू परिवार पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार
प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में एक व्यापक चार्जशीट दाखिल की है। इसमें राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के साथ-साथ उनके बेटे तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव और पत्नी राबड़ी देवी का नाम शामिल है। इसके अलावा मीसा भारती, हेमा यादव और कई अन्य सहयोगियों को भी मुख्य आरोपी बनाया गया है। कोर्ट में बार-बार सुनवाई टलने से आरोपियों को कुछ समय की राहत तो मिली है, लेकिन कानूनी शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। अब सबकी निगाहें 22 मई की तारीख पर टिकी हैं।
होटल टेंडर घोटाला: क्या है पूरा मामला?
यह भ्रष्टाचार का मामला उस दौर का है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। जांच एजेंसियों के अनुसार, साल 2004 से 2014 के बीच आईआरसीटीसी के दो होटलों के रखरखाव के लिए टेंडर जारी किए गए थे। आरोप है कि इन टेंडर को देने में सरकारी नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। एक खास निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए पूरी प्रक्रिया में हेरफेर किया गया। सीबीआई और ईडी का दावा है कि इस भ्रष्टाचार से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
रिश्वत में मिली जमीन और करोड़ों का फायदा
जांच एजेंसियों का दावा है कि टेंडर के बदले लालू परिवार से जुड़ी कंपनियों को बेशकीमती जमीनें ट्रांसफर की गईं। सीबीआई का आरोप है कि लालू यादव ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए निजी कंपनियों से आर्थिक लाभ लिए। इस घोटाले की जांच के दौरान दिल्ली, पटना, रांची और गुरुग्राम जैसे शहरों में ताबड़तोड़ छापेमारी की गई थी। इन छापों में जांच एजेंसियों को कई ऐसे दस्तावेज मिले, जो सीधे तौर पर लालू परिवार की संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं।
राजनीतिक साजिश या भ्रष्टाचार का खेल?
सीबीआई ने इस मामले में 7 जुलाई 2017 को पहली एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद से ही लालू परिवार लगातार अदालती कार्रवाई का सामना कर रहा है। हालांकि, लालू यादव और उनके समर्थकों का दावा है कि यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है। उनका कहना है कि विपक्षी नेताओं को डराने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। अब 22 मई को कोर्ट का फैसला यह तय करेगा कि लालू परिवार के खिलाफ मुकदमा किस दिशा में आगे बढ़ेगा।


