क्या X-Ray और CT Scan की रेडिएशन वाकई जानलेवा है? एक्सपर्ट से जानिए इसके पीछे का कड़वा सच

Delhi News: आधुनिक चिकित्सा पद्धति में बीमारियों का सटीक पता लगाने के लिए एक्स-रे और सीटी स्कैन अब अनिवार्य हो गए हैं। ये मेडिकल इमेजिंग टेस्ट न केवल डॉक्टर को इलाज की सही दिशा दिखाते हैं, बल्कि गंभीर स्थितियों का समय रहते आकलन भी करते हैं। हालांकि, आम लोगों के मन में अक्सर यह डर बना रहता है कि इन मशीनों से निकलने वाली रेडिएशन शरीर को कितना नुकसान पहुंचा सकती है। नई दिल्ली स्थित कैपिटल हेल्थ क्लिनिक के विशेषज्ञ रेडियोलॉजिस्ट ने इस चिंता पर विस्तार से रोशनी डाली है।

मेडिकल इमेजिंग में रेडिएशन का विज्ञान और इसका प्रभाव

एक्स-रे और सीटी स्कैन ‘आयनाइजिंग रेडिएशन’ का उपयोग करते हैं। यह ऊर्जा का एक ऐसा शक्तिशाली रूप है, जो मानव शरीर के आर-पार जाकर अंदरूनी अंगों की स्पष्ट तस्वीर पेश करता है। इसी रेडिएशन की मदद से हड्डियों के टूटने या फेफड़ों के संक्रमण की सटीक जानकारी मिलती है। डॉक्टर समझाते हैं कि यह तकनीक शरीर के भीतर मौजूद जटिल संरचनाओं की सटीक इमेजिंग के लिए ऊर्जा का संतुलित उपयोग करती है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से नियंत्रित और वैज्ञानिक मानकों पर आधारित होती है।

एक्स-रे बनाम सीटी स्कैन: किसमें है कितना बड़ा जोखिम?

रेडिएशन की मात्रा के मामले में चेस्ट एक्स-रे सबसे सुरक्षित माना जाता है। एक बार छाती का एक्स-रे कराने पर शरीर को उतनी ही रेडिएशन मिलती है, जितनी 2-3 दिनों में सूरज की रोशनी से प्राकृतिक रूप से मिलती है। इसके विपरीत, सीटी स्कैन अधिक एडवांस तकनीक है जो शरीर की सैकड़ों बारीक ‘क्रॉस-सेक्शनल’ तस्वीरें लेती है। इसलिए, पेट का एक सीटी स्कैन शरीर को 2 से 3 सालों तक मिलने वाली प्राकृतिक रेडिएशन के बराबर खुराक दे सकता है।

ALARA सिद्धांत: मरीजों की सुरक्षा के लिए डॉक्टरों का विशेष कवच

हौज खास स्थित कैपिटल हेल्थ क्लिनिक की डायरेक्टर डॉ. बिमलप्रीत मोहन के अनुसार, ये टेस्ट पूरी तरह सुरक्षित हैं। वे बताती हैं कि चिकित्सा जगत ‘ALARA’ यानी ‘As Low As Reasonably Achievable’ सिद्धांत का पालन करता है। इसका सीधा अर्थ है कि मरीज की बीमारी का पता लगाने के लिए न्यूनतम संभव रेडिएशन डोज का ही इस्तेमाल किया जाता है। जोखिम केवल तभी उत्पन्न होता है, जब बिना किसी चिकित्सकीय कारण के बार-बार या अनावश्यक रूप से शरीर रेडिएशन के संपर्क में आता है।

किन स्थितियों में अनिवार्य हो जाता है सीटी स्कैन और एक्स-रे?

किसी भी हादसे में फ्रैक्चर या गंभीर चोट लगने पर ये टेस्ट जीवनरक्षक साबित होते हैं। ट्यूमर की पहचान, आंतरिक रक्तस्राव (इंटरनल ब्लीडिंग) और जटिल सर्जरी से पहले डॉक्टर इन इमेजिंग टेस्ट की सहायता लेते हैं। क्रोनिक बीमारियों की निगरानी के लिए भी यह तकनीक अचूक है। हालांकि, गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों के मामलों में रेडियोलॉजिस्ट अतिरिक्त सावधानी बरतते हैं। विशेष परिस्थितियों में ही उन्हें इस प्रक्रिया से गुजरने की सलाह दी जाती है ताकि सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

रेडिएशन का डर छोड़ें, विशेषज्ञों की सलाह पर करें भरोसा

एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन टेस्ट से होने वाले फायदे संभावित जोखिमों की तुलना में कहीं अधिक हैं। डॉक्टर तभी स्कैन की सलाह देते हैं जब वह मरीज के बेहतर स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य होता है। इमेजिंग टेस्ट हमेशा अनुभवी प्रोफेशनल्स द्वारा ही किए जाते हैं, जो सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करते हैं। यदि आपके मन में रेडिएशन को लेकर कोई दुविधा है, तो डॉक्टर से खुलकर बात करना सबसे बेहतर विकल्प है। याद रखें, समय पर सही जांच ही बेहतर उपचार की पहली सीढ़ी है।

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