कैसे हासिल किए 99.6% अंक? दिल्ली की अरात्रिका पटनायक ने सीबीएसई 10वीं बोर्ड में रचा इतिहास

Delhi News: सफलता रातों-रात नहीं मिलती, बल्कि यह हर दिन खुद को बेहतर बनाने की जिद का सुखद परिणाम है। दिल्ली की अरात्रिका पटनायक ने साल 2026 की सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा में 99.6% का जादुई आंकड़ा छूकर इतिहास रच दिया है। अरात्रिका की यह शानदार उपलब्धि उन लाखों छात्रों के लिए एक बड़ी मिसाल बन गई है, जो आगामी 2027 की बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होंगे। उन्होंने न केवल अपने माता-पिता, बल्कि पूरी राजधानी का गौरव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया है।

99.6% अंकों के पीछे छिपा है अरात्रिका का ‘गोल्डन’ मंत्र

दिल्ली पब्लिक स्कूल (वसंत कुंज) की मेधावी छात्रा अरात्रिका पटनायक ने अपनी सफलता का श्रेय सधी हुई योजना को दिया है। उन्होंने बताया कि पढ़ाई को कभी बोझ नहीं समझना चाहिए। अरात्रिका ने कभी घंटों के हिसाब से पढ़ाई नहीं की, बल्कि उनके लिए ‘क्वालिटी स्टडी’ सबसे अधिक मायने रखती थी। ‘खुद को चुनौती देते रहें’ के मंत्र ने उन्हें देश के टॉप स्कोरर्स की फेहरिस्त में सबसे ऊपर खड़ा कर दिया। उनकी यह जीत कड़ी मेहनत और लगन का प्रमाण है।

रटने के बजाय समझने पर जोर और NCERT का आधार

अरात्रिका पटनायक का मानना है कि आपकी असली प्रतियोगिता किसी और से नहीं बल्कि स्वयं से होती है। उन्होंने अपनी तैयारी के दौरान एनसीईआरटी (NCERT) की किताबों को ही अपना मुख्य आधार बनाया। उन्होंने विषयों को रटने के बजाय कॉन्सेप्ट्स को गहराई से समझने पर जोर दिया। अरात्रिका हर दिन पिछले दिन के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करने का प्रयास करती थीं। उनका कहना है कि जब आप कंफर्ट जोन से बाहर निकलते हैं, तभी असली सुधार संभव हो पाता है।

तनाव को दूर करने के लिए पेंटिंग और संगीत का सहारा

अरात्रिका केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे बहुमुखी प्रतिभा की धनी भी हैं। उन्होंने परीक्षा की तैयारी के दौरान तनाव को कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। संगीत सुनना और पेंटिंग करना उनकी पसंदीदा हॉबीज में शामिल है। अरात्रिका के अनुसार, ये गतिविधियां उन्हें लंबे समय तक पढ़ाई करने के बाद मानसिक रूप से तरोताजा रखती थीं। वे मानती हैं कि सिलेबस पूरा करने के साथ-साथ अच्छे अंकों के लिए मेंटल हेल्थ का ख्याल रखना अनिवार्य है।

भविष्य का लक्ष्य: विज्ञान के क्षेत्र में देश की सेवा

अपनी इस शानदार कामयाबी के बाद अरात्रिका ने भविष्य के लिए भी ऊंचे लक्ष्य तय किए हैं। वे आगे चलकर विज्ञान के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहती हैं। उनका सपना वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से भारत के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान देना है। अरात्रिका की कहानी यह सिखाती है कि सही टाइम मैनेजमेंट और जुनून के साथ किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उनकी सफलता ने दिल्ली के शैक्षणिक वातावरण में नई ऊर्जा का संचार कर दिया है।

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