दिल्ली में अब शोर मचाने वालों की खैर नहीं, DPCC का नया सख्त SOP लागू, तीन दिन में होगी जांच, रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर पर पूरी पाबंदी

Delhi News: राजधानी में लगातार बढ़ते शोर पर सख्त लगाम लगाने के लिए दिल्ली प्रदूषण कंट्रोल कमिटी ने पूरी तैयारी कर ली है। डीपीसीसी ने एक नया स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर यानी एसओपी जारी कर तुरंत लागू कर दिया है। अब शोर की किसी भी शिकायत पर टीम तीन दिनों के भीतर मौके पर पहुंचकर जांच करेगी। ध्वनि प्रदूषण मानकों से ज्यादा पाए जाने पर भारी पर्यावरण जुर्माना लगाने के साथ ही पुलिस की मदद से शोर मचाने वाले उपकरण भी जब्त कर लिए जाएंगे।

रेस्टोरेंट और पब की हर शिकायत पर तुरंत एक्शन

डीपीसीसी के अधिकारियों ने बताया कि यह नया एसओपी सुनिश्चित करेगा कि शोर से जुड़ी सभी शिकायतों का बेहद तेजी से निपटारा हो सके। इसके तहत रेजिडेंशल, कमर्शल और इंडस्ट्रियल तीनों प्रकार के क्षेत्रों में म्यूजिक सिस्टम और अन्य शोर पैदा करने वाले उपकरणों पर सीधी कार्रवाई की जाएगी। डीपीसीसी के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी रेस्टोरेंट, पब और बार को इस दायरे में रखा गया है। विभिन्न विभागों से आने वाली हर शिकायत को एक विशेष सेल में दर्ज किया जाएगा।

नॉइस पल्युशन रूल्स 2000 के तहत होगी पूरी कार्रवाई

यह पूरी सख्त कार्रवाई नॉइस पल्युशन (रेगुलेशन एंड कंट्रोल) रूल्स, 2000 के तहत अमल में लाई जाएगी। इस व्यापक नियम के दायरे में लाउडस्पीकरों, वाहनों के हॉर्न, निर्माण स्थलों और फैक्ट्रियों से निकलने वाले शोर को सख्ती से नियंत्रित किया जाएगा। सबसे अहम बात यह है कि रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच बिना किसी आधिकारिक अनुमति के लाउडस्पीकर बजाने पर पूर्णतया प्रतिबंध रहेगा और इसका उल्लंघन करने वालों पर बिना देरी किए कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।

अलग-अलग जगहों के लिए शोर की तय सीमा

नए एसओपी में अलग-अलग इलाकों के लिए दिन और रात के हिसाब से शोर की अधिकतम सीमा तय कर दी गई है। औद्योगिक क्षेत्रों में यह सीमा दिन में 75 डेसिबल और रात के समय 70 डेसिबल रखी गई है। रिहायशी इलाकों के लिए दिन में 55 डेसिबल और रात में 45 डेसिबल से ज्यादा शोर करने की इजाजत नहीं है। वहीं साइलेंस जोन यानी अस्पतालों और स्कूलों के आसपास के इलाकों में दिन में 50 डेसिबल और रात में 40 डेसिबल की सख्त पाबंदी लगा दी गई है। इस कदम से आम नागरिकों को ध्वनि प्रदूषण से काफी हद तक राहत मिलने की पूरी उम्मीद है। दिल्ली वाले अब चैन की नींद सो सकेंगे और दिन में भी अनावश्यक शोर से काफी राहत मिलेगी। डीपीसीसी की यह पहल निश्चित तौर पर राजधानी के लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में मददगार साबित होगी। नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित जांच अभियान चलाए जाएंगे। नियम तोड़ने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। लोगों से भी अपील है कि वे ध्वनि प्रदूषण की शिकायत तुरंत संबंधित विभाग को करें।दिल्ली प्रदूषण कंट्रोल कमिटी (DPCC) ने राजधानी में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए सख्त कदम उठाया है। इसके तहत शोर से संबंधित हर शिकायत पर अब तीन दिनों के भीतर जांच की जाएगी और टीम मौके पर पहुंचकर ध्वनि प्रदूषण की पुष्टि करेगी। मानकों से अधिक शोर पाए जाने पर पर्यावरण जुर्माना लगाने के साथ-साथ पुलिस की सहायता से शोर मचाने वाले उपकरणों को तत्काल जब्त करने का आदेश जारी कर दिया गया है।

डीपीसीसी ने इस संदर्भ में एक नया स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (SOP) जारी कर तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया है। अधिकारियों का मानना है कि इस नए एसओपी के चलते शोर की शिकायतों का निस्तारण अब पहले से कहीं अधिक तेजी से होगा और लोगों को ध्वनि प्रदूषण से राहत मिलेगी।

इस एसओपी के तहत रिहायशी, व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्रों में म्यूजिक सिस्टम, लाउडस्पीकर और ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले अन्य उपकरणों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के नियम स्पष्ट कर दिए गए हैं। डीपीसीसी के अधिकार क्षेत्र में आने वाले रेस्टोरेंट, पब, बार और अन्य प्रतिष्ठानों से जुड़ी सभी शिकायतों का समय पर निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा। इसके लिए एक विशेष सेल बनाया गया है जो विभिन्न विभागों से आने वाली सभी शिकायतों को रजिस्टर्ड करेगा।

नए एसओपी के अनुसार, यह संपूर्ण कार्रवाई ‘नॉइस पल्युशन (रेगुलेशन एंड कंट्रोल) रूल्स, 2000’ के तहत पूरी की जाएगी। इस नियम के दायरे में लाउडस्पीकर, वाहनों के हॉर्न, निर्माण कार्य और फैक्ट्रियों से होने वाले शोर को नियंत्रित किया जाएगा। विशेष रूप से, रात 10 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक बिना आधिकारिक अनुमति के किसी भी प्रकार का लाउडस्पीकर चलाना पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा।

शोर के तय मानकों की बात करें तो, औद्योगिक क्षेत्रों में दिन के समय शोर की अधिकतम सीमा 75 डीबी और रात के समय 70 डीबी निर्धारित की गई है। इसी प्रकार, रिहायशी क्षेत्रों में दिन के समय यह सीमा 55 डीबी और रात में 45 डीबी है। संवेदनशील साइलेंस जोन के लिए दिन में 50 डीबी और रात में 40 डीबी की सख्त सीमा तय की गई है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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